यूँ ही मन लगा कर रियाज़ करते रहो
Posted By: Kafal Treeon:
हर सुबह की तरह इस सुबह भी श्रीमतीजी और बच्चे बाथरूम के दरवाजे पर रुक कर, मुझे कुछ इस तरह देख रहे थे, जैसे राह चलते लोग रुक कर बन्दर का तमाशा देखते हैं. मैं गलगलिया की तरह मुँह ऊपर कर के कभी... Read more
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