उस दिन शिकार पर गया मैं पछेटिया बन कर
Posted By: Kafal Treeon:
एक दिन मुझे पछेटिया बन कर सचमुच शिकार पर जाने का मौका मिल गया. पछेटिया मतलब शिकारी के पीछे-पीछे चलने वाला आदमी. शिकारी थे नयाल मास्साब, जिन्हें शिकार मारने का बेहद शौक था. शिकार तो बस नाम भर... Read more
कुमारस्वामी और काम के वे दिन
Posted By: Girish Lohanion:
कहो देबी, कथा कहो – 45 पिछली कड़ी – कहां थे मेरे उजले दिन “हां, तो कहो देबी. फिर क्या हुआ? तुम किसी नाटक की बात कर रहे थे?” “हां तो सुनो, मैं नाटक की बात करने आला अफसर हरवंत सिंह जी के... Read more
कहां थे मेरे उजले दिन
Posted By: Kafal Treeon:
कहो देबी, कथा कहो – 44 पिछली कड़ी – तोर मोनेर कथा एकला बोलो रे सांझ ढल गई थी और अंधेरा घिरने के साथ-साथ ट्रेन से दिखाई देते गांवों और नगरों में बिजली की बत्तियां जगमगाने लगीं. शताब्दी ट... Read more
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