सन् चौहत्तर के आस-पास की बात है. कोटद्वार में कर्मभूमि के संपादक स्व० भैरवदत्त धूलिया के घर में टिंचरी माई और पीताम्बर डेवरानी बैठे थे. माई किसी वजह से अस्थिर थीं. बातें करते-करते उठतीं और ज... Read more
नशा हमेशा से ही उत्तराखण्ड की प्रमुख समस्या रहा है. उत्तराखण्ड की जनता इस असमाधेय समस्या के खिलाफ समय-समय पर उठ खड़ी होती है. आज भी शराब के ठेकों की नीलामी के समय समूचा पहाड़ शराब माफियाओं और... Read more
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