बेटियों को जबरन बेटा बनाते हम लोग
महिला अधिकारों के नाम पर रस्म अदायगी का एक दिन और आ कर चला जाएगा 8 मार्च (International Women’s Day) को. साल में 364 दिन पुरुषों के एकाधिकार के और एक दिन महिलाओं के लिये. इस पर भी कथित... Read more
वो स्त्रियोचित हो जाना नहीं था
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) पर हमारे नियमित सहयोगी अमित श्रीवास्तव की यह मर्मभेदी रचना पढ़िए. बराबरी -अमित श्रीवास्तव किसी दिन किसी समय कहीं एंटी एनक्रोचमें... Read more
महिला सुरक्षा, अपराध और महिला उत्थान में है परिवर्तित नजरिए की दरकार: भारतीय समाज की बनावट अनादि काल से सामंतवादी रही है. ऋग्वेद के काल में जब ऋचाओं में अपनी आवश्यकताओं के लिए मनुष्य ने देवत... Read more
ये हैं उत्तराखण्ड की सात महत्वपूर्ण स्त्रियाँ
पहाड़ में महिलाओं के जीवन का नाम ही संघर्ष है. विषम भौगोलिकता के बावजूद पहाड़ की महिलायें राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय मंचों पर अपना नाम करने में कामयाब रही हैं. विश्व महिला दिवस पर जानिये उत्तर... Read more
Popular Posts
- कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
- दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है
- उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी
- एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!
- रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन
- हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी
- भारतीय परम्परा और धरती मां
- एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता
- बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान
- शकटाल का प्रतिशोध
- बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है
- जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि
- आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’
- द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा
- हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता
- पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया
- कुमाऊँ की खड़ी होली
- आधी सदी से आंदोलनरत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव
- फूल, तितली और बचपन
- पर्वतीय विकास – क्या समस्या संसाधन की नहीं शासन उपेक्षा की रही?
- अनूठी शान है कुमाऊनी महिला होली की
- धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- कथा दो नंदों की
- इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी
- अल्मोड़े की लखौरी मिर्च
