एक मरा हुआ मनुष्य इस समय जीवित मनुष्य की तुलना में ज़्यादा कह रहा है: मंगलेश डबराल की याद में
मैं जब भी यथार्थ का पीछा करता हूं देखता हूं वह भी मेरा पीछा कर रहा है मुझसे तेज़ भाग रहा है. उस रोज़ कौन जानता था कि वो नये सफ़र पर निकलने वाले थे. ये न घर का रास्ता था न कोई आवाज़ थी न कोई... Read more
हर कवि की एक मूल संवेदना होती है जिसके इर्द-गिर्द उसके तमाम अनुभव सक्रिय रहते हैं. इस तरह देखें तो वीरेन के काव्य व्यक्तित्व की बुनियादी भावना प्रेम है. ऐसा प्रेम किसी भी अमानुषिकता और अन्या... Read more
फादर्स डे स्पेशल: मंगलेश डबराल की कविता
पिता की तस्वीर मंगलेश डबराल पिता की छोटी छोटी बहुत सी तस्वीरें पूरे घर में बिखरी हैं उनकी आँखों में कोई पारदर्शी चीज साफ चमकती है वह अच्छाई है या साहस तस्वीर में पिता खाँसते नहीं व्याकुल नही... Read more
गाँव में आवाजें
साहित्य अकादेमी पुरुस्कार से सम्मानित मंगलेश डबराल (Manglesh Dabral) हमारी भाषा के जाने माने कवि हैं. 16 मई 1948 को उत्तराखंड के गढ़वाल में काफलपानी नामक गाँव में जन्मे मंगलेश के प्रकाशित कव... Read more
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