पहाड़ में दिवाली, धान और उसके पकवान
दिवाली में जिस धान्य का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है वह है धान. धान को शुभ माना जाता है. देवता को अक्षत वारने से ले पिठ्या लगाने कलश स्थापन, भूमि पूजन, संकल्प पूजन में इसका प्रयोग होता है. अखं... Read more
पहाड़ में पेड़-पौंध और खेती-पाती का लोक नामकरण
पहाड़ में पेड़ पौंधों के प्रति आदर का भाव रहा है इसीलिए उन्हें वनदेवता-वनदेवी के रूप में धार्मिक आधार मिला. वृक्ष एवं वनों को सक्रिय तत्व के रूप में सम्मान दिया गया. इनसे प्राप्त कच्चा माल द... Read more
तिब्बत व्यापार की अनोखी प्रणालियां और बंदोबस्त
तिब्बत में भोटान्तिकों का व्यापार वहां की अनेकानेक मंडियों में होता था. इनमें मुख्य तकलाकोट, ज्ञानिमा, गरतोक, चकरा, शिवचिलम, ख्युंग लिङ्ग, दरचेन, कुंलिङ्ग, थुलिङ्ग, पुंलिङ्ग, नावरा, लामा छोर... Read more
भोटान्तिक व्यापार के रास्ते, तरीके और माल असबाब
मल्ला दारमा के भोटान्तिकों का व्यापार पथ जो अजपथ और अश्व पथ से विकसित हुआ वह दारमा दर्रे (18510फ़ीट) से हो कर जाता था. वहीं व्यांस और चौंदास पट्टियों के भोटान्तिक लंगप्याँलेख (18150 फ़ीट) और... Read more
भोटान्तिक अर्थव्यवस्था और हूण देश से व्यापार
इतिहास के पुराने पन्नों में गंगा के मैदानों से हिमालय की गगनचुम्बी उपत्यकाओं की ओर अपने पशुओं के साथ बढ़ती भिल्ल किरात जाति के प्रवेश की गाथा है. पशुचारकों का जीवन जीते प्रकृति के सान्निध्य... Read more
सुरेंद्र सिंह वल्दिया : सोर घाटी से अर्जुन अवार्ड तक एक ठेठ पहाड़ी की यात्रा
सोर घाटी में जूनून की हद तक खेलों की दीवानगी रही है. छोटे बड़े मैदानों में सुबह शाम जमा होते खिलंदड़े, अपने बदन की ताकत को एक फन में बदलते, मांसपेशियों का जोर दिखाते, भुजाओं में उभर आ रही मछ... Read more
सालाना करोड़ों मुनाफ़ा कमाने वाली चंडाक मैग्नेसाइट फैक्ट्री के बंद होने की कहानी
प्रख्यात भूगर्भशास्त्री डॉ. खड्ग सिंह वल्दिया ने अपने अध्ययन में यह आंकलन किया था कि पिथौरागढ़ जनपद में मैग्नेसाइट के विशाल भंडार विद्यमान हैं. तदन्तर प्रोफेसर नौटियाल, नाथ एवं बाकलू, दूबे ए... Read more
पहाड़ों में सातों-आठों की बहार आ गयी है
भादों की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कुमाऊं और नेपाल में हर्षोल्लास और श्रृद्धा भक्ति से भरा प्रकृति को समर्पित, उसकी पूजा का त्यौहार मनाया जाता है सातूं आठूं. शिव पार्वती तो हिमालय में ही वास क... Read more
पहाड़ में नीली क्रांति को समर्पित कुमकुम साह
पंडा फार्म पिथौरागढ़ में कभी कभार ताजी साग सब्जी खरीदने, अंडा मुर्गी लेने जाना होता. जर्सी नसल की गायों का दूध भी मिलता. यह चीजें मिलने का टाइम तय होता. सुबह और शाम. सारा माल बिलकुल ताज़ा और... Read more
लोक में रचे बसे रंग और पहाड़ की कलाकारी
पहाड़ में अपनी भावनाओं को रेखाओं, आकृतियों का रूप दे उनमें रंग भर जीवंत कर देना हर घर-आँगन, देली-गोठ और देबता की ठया में दिखाई देता. इसमें हाथ का सीप होता. कुछ नियम कायदों के संग सीधी सादी म... Read more
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