फोटो : अमित साह
नैनीताल की झील सात पहाड़ियों से घिरी हुई है. इन पहाड़ियों के नाम हैं: (Seven Hills of Nainital)
इनमें से अयार पाटा का नाम उस इलाके में उगने वाले अयार (Andromeda Ovalifolia) के पेड़ों के नाम पर पड़ा है. हांडी बांडी (अथवा हानी बानी) का नाम इस इलाके में सुनाई पड़ने वाली गूंजों-अनुगूंजों पर पड़ा है जिसे लोग शैतान की हंसी कहते हैं. (Seven Hills of Nainital)
शेर का डांडा, जैसा कि नाम से जाहिर है, शेर (*हालांकि पहाड़ों में बाघ और गुलदार ही पाए जाते हैं, शेर नहीं. अलबत्ता जनभाषा में इन दोनों को शेर भी कहे जाने का रिवाज रहा है.) के जंगल के लिए प्रयुक्त हुआ है.
लड़िया कांटा का नाम (जहाँ आज सेना का राडार स्टेशन स्थापित है) का नाम किसी भुला दी गयी देवी के नाम पर पड़ा है.
एक ही दिन में इन सातों पहाड़ियों को चढ़ लेने के कारनामों की रपटें लगातार आती रहती हैं अलबत्ता इस कार्य को करने की कोशिश उन्हीं लोगों ने करनी चाहिए जो शारीरिक रूप से सक्षम हों.
[स्रोत: 1928 में नैनीताल के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर जे. एम. क्ले द्वारा प्रकाशित किताब ‘नैनीताल: अ हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिपटिव अकाउंट’ के पहले अध्याय से जिसे नैनीताल के तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर एल. सी. एल. ग्रिफिन, ICS द्वारा लिखा गया था. इस महत्वपूर्ण किताब में नैनीताल के इतिहास, भूगोल और वन्य-संपदा के बारे में महत्वपूर्ण विवरण पढ़ने को मिलते हैं. साथ ही आज से तकरीबन सौ वर्ष पुराने नैनीताल की महत्वपूर्ण इमारतों, सार्वजनिक व्यवस्थाओं और एनी महत्वपूर्ण मामलों के बारे में भी आवश्यक सामग्री पाई जा सकती है. आने वाले दिनों में हम आपको इस किताब से कुछ और दिलचस्प हिस्से पढ़ाएंगे.]
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
माला नाम था उसका. छरहरी काया, बला की ख़ूबसूरत. लेडीज साइकिल से जब कॉलेज आती,…
उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा…
पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी…
पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा…
जिम कॉर्बेट उन चुनिंदा विदेशी मूल के भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने भारत में…
रात का वक्त था. जुलाई की बारिश पहाड़ों को भिगो रही थी, और भिलंगना नदी हमेशा…