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एक ऑटो चालक के क्रिकेटर बेटे की सच्ची कहानी

जानिए कैसे Power of Visualisation और अवचेतन मन की शक्ति से बनाई उसने अपनी सफलता की राह. विडियो ज़रूर देखें
(Aakash Mishra)

आज से करीब तीन साल पहले की बात है. कांदिवली में नवभारत टाइम्स का हेल्प अ स्टार मुहिम के तहत कार्यक्रम हो रहा था. इस कार्यक्रम में पंद्रह चुने हुए छात्र-छात्राओं को हमारे पाठकों द्वारा भेजी गई धनराशि के चेक बांटे जाते हैं. बहुत ही संजीदा कार्यक्रम होता है, जहां इन छात्र-छात्राओं के संघर्ष की कहानियां सुनकर बरबस आंखों से आंसू निकल आते हैं.

इस कार्यक्रम में हम बच्चों के माता-पिता को भी बुलाते हैं. मंच पर बुलाकर हम उन्हें भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर देते हैं. माइक हाथ में आते ही लगभग हर माता-पिता का गला भर आता है. उन्हें समझ नहीं आता कि वे किन शब्दों में मदद का हाथ बढ़ाने वाले लोगों का धन्यवाद करें.

एक ऐसे ही कार्यक्रम के दौरान मुझ से एक व्यक्ति मिलने आए सत्यप्रकाश मिश्रा. उन्होंने मुझे अपने बेटे की भी मदद करने की गुजारिश की. मैंने उन्हें कभी दफ्तर आकर मिलने को कहा और मैं इस वाकये को भूल गया. कुछ महीनों के बाद वह शख्स मुझ से मिलने दफ्तर आए. मैंने उन्हें पहचाना नहीं. उन्होंने मुझे बताया कि वह वसई में रहते हैं और ऑटो चलाते हैं. उनका बेटा क्रिकेटर बनना चाहता है, पर बहुत कमजोर है. उसे देखकर लगता नहीं कि वह क्रिकेटर बन भी पाएगा या नहीं. उन्होंने मुझ से निवेदन किया कि मैं उनके बेटे को कुछ बनने में मदद करूं. उन्होंने मुझे यह भी बताया कि उनकी माताजी बहुत बीमार चल रही हैं. वह किसी तरह उनका इलाज करवा रहे हैं.
(Power of Visualisation Aakash Mishra)

आकाश और उनके पिता सत्यप्रकाश मिश्रा

मुझे उनकी स्थिति देख मन ही मन बहुत तरस तो आया, पर मैं खुद ऐसी स्थिति में नहीं था कि मैं उनके लिए ज्यादा कुछ कर पाता. पर मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि वह बिलकुल चिंता न करें, बहुत जल्दी सब ठीक हो जाएगा. उन्हीं सत्यप्रकाश मिश्रा का बेटा है आकाश मिश्रा, जिसने हमारी मुलाकात के अगले साल ही मुंबई की अंडर-19 टीम से कूचविहार ट्रॉफी में भाग लिया.

आकाश एक फास्ट बॉलर बनना चाहता था और जब उसके पिता मुझसे मिले थे, तब वाकई वह कमजोर था. उसे जब-तब चोट लगती रहती थी और उसमें मानसिक दृढ़ता का भी अभाव था. लेकिन उसमें एक ऐसी बात थी, जो बाकी लोगों में नहीं मिलती. उसने मेरी बताई बातों पर भरोसा किया. मैंने उसे सुबह जल्दी उठना शुरू करने को कहा. उसने किया. मैंने उसे पावर ऑफ विजुअलाइजेशन के बारे में बताया.

रोज रात को सोने से पहले अपने अवचेतन मन में अपनी सफलता के दृश्य भेजने को कहा. उसने रोज ऐसा ही किया. मैंने उसे सुबह उठकर ध्यान और प्राणायाम करने को कहा, उसने किया. आज आकाश मिश्रा को आईपीएल की फ्रेंचाइज केकेआर के कोच अपने नेट्स में बॉलिंग करने को बुलाते हैं. आकाश एक-दो साल में मुंबई की रणजी टीम और फिर इंडिया के लिए खेल सकता है.
(Power of Visualisation Aakash Mishra)

-सुंदर चंद ठाकुर

इसे भी पढ़ें: सोचो और यकीन करो, तो जो चाहोगे वो पाओगे

लेखक के प्रेरक यूट्यूब विडियो देखने के लिए कृपया उनका चैनल MindFit सब्सक्राइब करें

कवि, पत्रकार, सम्पादक और उपन्यासकार सुन्दर चन्द ठाकुर सम्प्रति नवभारत टाइम्स के मुम्बई संस्करण के सम्पादक हैं. उनका एक उपन्यास और दो कविता संग्रह प्रकाशित हैं. मीडिया में जुड़ने से पहले सुन्दर भारतीय सेना में अफसर थे. सुन्दर ने कोई साल भर तक काफल ट्री के लिए अपने बचपन के एक्सक्लूसिव संस्मरण लिखे थे जिन्हें पाठकों की बहुत सराहना मिली थी.

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