हैडलाइन्स

यह उत्तराखंड की एक आम तस्वीर है

तस्वीर में कुछ ग्रामीण एक गर्भवती महिला को अस्पताल को ले जा रहे हैं. इससे पहले दो दिन तक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही. जब गांव वालों ने महिला की मदद करनी चाही तो गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाने के लिये उनके पास सिवा टूटे हुए स्ट्रेचर के कुछ न था.  गांव के युवा और बुजुर्ग गर्भवती महिला को इन्हीं डंडियों और रस्सी से बंधे स्ट्रेचर पर 18 किमी पैदल लाये. यह तस्वीर उत्तराखंड की एक आम तस्वीर है.
(Poor Health Stretcher Uttarakhand)  

यह तस्वीर और घटना जोशीमठ विकासखंड के डुमक गांव की है. डुमक गांव की दीक्षा देवी को गांव वाले 18 किमी पैदल एक जुगाड़ स्ट्रेचर में सड़क तक लाये जहां से 14 किमी का सफ़र तय करने के बाद बीते दिन दीक्षा ने एक नवजात को जन्म दिया.

उत्तराखंड राज्य पहाड़ के नाम पर बना. पहाड़ के नाम पर मैदानों में खूब राजनीति होती है. बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जाती हैं पर पहाड़ के जमीनी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. गोपेश्वर की यह घटना पहाड़ में घटने वाली सबसे सामान्य घटनाओं में एक है. कुछ बीतेंगे और एक ऐसी ही ख़बर आयेगी जिसमें गोपेश्वर के स्थान पर किसी अन्य कस्बे का नाम और दीक्षा के नाम पर किसी अन्य पहाड़ी का नाम होगा, हालात ऐसे ही रहेंगे. पहाड़ में स्वास्थ्य सुवधाएँ कमजोर नहीं गायब हैं. जीने के लिए जरुरी आधारभूत स्वास्थ्य सुविधा तक पहाड़ में मौजूद नहीं हैं.
(Poor Health Stretcher Uttarakhand)

स्वास्थ्य सुविधा की बदहाली किसी से नहीं छुपी है. उत्तराखंड के चुने हुए विधायक तो ख़ुद अपने ईलाज के लिए राज्य के बाहर का ही रुख करते हैं. पर्वतीय क्षेत्र से चुने गये विधायकों में शायद ही ऐसा कोई विधायक हो जिसने स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर अपने जिला अस्पताल का रुख किया हो.   

हफ्ता-दस घुमने के लिए पहाड़ बड़े प्यारे हैं लेकिन बिना आधारभूत सेवाओं के चल रहा पहाड़ का जीवन बेहद मुश्किल है. 22 साल बीतने के बाद उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग कम से कम सामान्य आधारभूत स्वास्थ्य सेवाओं के हकदार तो माने ही जाने चाहिये. कब तक पहाड़ी इस तरह ठगे जायेंगे.
(Poor Health Stretcher Uttarakhand)   

-पिथौरागढ़ से मनीष सिंह

काफल ट्री डेस्क

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  • कहीं किसी की कोई जवाबदेही नहीं है और ईमान (नैतिकता) तो हर उस स्वास्थ्यकर्मी की भी मर चुकी है जो पहाड़ों में पोस्टिंग होने पर भी मैदानों में मौज काट रहे हैं ।

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