उत्तराखण्ड के चमोली जिले में वाण गाँव एक जाना-पहचाना नाम है. वाण से बेदिनी बुग्याल और रूपकुंड के लिए पैदल रास्ता शुरू होता है. यह वाण से शुरू होने वाला एक लोकप्रिय और जाना-पहचाना ट्रैक है, लेकिन वाण गाँव से कई और रास्ते भी आपको हिमालय की अद्भुत दुनिया में ले जाते हैं. ऐसा ही एक रास्ता वाण से कनोल गाँव की तरफ जाता है. लगभग 8 किमी का यह रास्ता अप्रतिम प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज है. वाण से चलने के बाद जैसे आपके सामने बचपन में पढ़ी गयी किसी किताब के पन्ने पलटने शुरू हो जाते हैं. प्रकृति के साथ-साथ निश्छल पहाड़ी लोग जीवन के सारतत्व से आपका परिचय करवाते है.
दो साल पहले मुझे एक बारात में वाण से कनोल जाने का मौका मिला. मैंने बारात के साथ चलना जरूर शुरू किया मगर रास्ते के मोहपाश ने ऐसा बाँधा कि निगाहें उसी में उलझकर रह गयीं. बारात का पीछा करता हुआ विवाह स्थल तक पहुंचा तो वहां दाल-भात की दावत चालू थी. इतनी सादगी भरी शादी कि दाल-भात और सूजी के हलवे के अलावा कोई व्यंजन जायका और पेट खराब करने के लिए था ही नहीं. यहाँ शहरों के सेठ शादी की दावत में धक्कमपेल मचा देते हैं जैसे उन्हें खाना नसीब नहीं होता हो और आज भी अगर देर की तो हाथ से निकल ही जायेगा. आठ किमी पहाड़ी रास्ते पर चलने के बाद इस दाल-भात का स्वाद और ज्यादा अद्भुत हो जाना लाजमी था.
शादी के बहाने किये इस सफ़र की कुछ तस्वीरें भी ले पाया. बेमौसमी बर्फबारी ने विवाह समारोह को और ज्यादा रूहानी बना दिया था.
सुधीर कुमार हल्द्वानी में रहते हैं. लम्बे समय तक मीडिया से जुड़े सुधीर पाक कला के भी जानकार हैं और इस कार्य को पेशे के तौर पर भी अपना चुके हैं. समाज के प्रत्येक पहलू पर उनकी बेबाक कलम चलती रही है. काफल ट्री टीम के अभिन्न सहयोगी.
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