Featured

पहाड़ियों में इन महीने ही क्यों होती है शादी

पहाड़ियों में बरस के बारह महीने शादी नहीं होती. एक वर्ष के बारह महीनों में कुछ ऐसे महीने तय हैं जिनमें विवाह होता है. मसलन मंगसीर, माघ और फागुन के पूरे महीने में शादियां हुआ करती हैं लेकिन सावन, भादौ, असौज, कार्तिक, पूस और चैत के महीने शादियाँ नहीं हुआ करती.
(Month of Marriage in Uttarakhand)

जेठ के महीने में शादियों के विषय में एक बड़ा रोचक तथ्य है. वैसे जेठ के पूरे महीने शादियां होती हैं लेकिन परिवार में सबसे बड़े बेटे या सबसे बड़ी बेटी की शादी इस महीने में नहीं की जाती है. इसके अलावा आषाढ़ के महीने में भी केवल आधे महीने ही शादियां होती हैं.

इसके अतिरिक्त वर्ष में एक ऐसा दिन भी है जिस दिन बिना दिन-बार के विवाह होते हैं. यह दिन असौज के महीने में आता है. असौज के महीने विजयादशमी के दिन भी पहाड़ियों में विवाह होते हैं.
(Month of Marriage in Uttarakhand)

पहाड़ों में आज भी शादियां मेल-जोल कर होती हैं. गांव के एक परिवार में शादी एक परिवार की नहीं पूरे गांव की सामूहिक ज़िम्मेदारी समझी जाती है. ध्यान से देखेने पर कि ऐसे कौन से महीने हैं जिनमें शादियां नहीं होती हैं एक बड़ा तार्किक कारण समझ आता है.

सावन, भादौ, असौज, कार्तिक, पूस और चैत ऐसे महीने हैं जिनमें पहाड़ में खूब काम होता है. काम जो खेतीबाड़ी से जुड़ा हुआ है. इन महीनों में फसल होने के कारण समय की खूब कमी रहती है.

पहाड़ों में जेठ, मंगसीर, माघ और फागुन के महीने सज के महीने कहे जाते हैं. सज के महीने का मतलब है जिन महीनों में काम अपेक्षाकृत कम हो. संभवतः यह एक कारण है कि पहाड़ियों में इन महीने में शादियां होती हैं.
(Month of Marriage in Uttarakhand)      

-काफल ट्री फाउंडेशन

इसे भी पढ़ें : उत्तराखण्ड की अनूठी विवाह परम्पराएँ

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

2 weeks ago

भारतीय परम्परा और धरती मां

हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता…

2 weeks ago

एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता

तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…

3 weeks ago

बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान

संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान…

3 weeks ago

शकटाल का प्रतिशोध

पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र…

3 weeks ago

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 months ago