समाज

गढ़वाली हिंगोड़: हॉकी और गोल्फ का पुरखा

इक्कीसवीं सदी में ओलम्पिक हॉकी का पहला पदक भारत ने हाल ही में जीता है. जर्मनी को हराकर, कांस्य पदक. पिछली सदी में भी आखिरी बीस साल ओलम्पिक पदक का सूखा ही रहा. एक दौर वो भी था, जब भारत फील्ड हॉकी में अजेय समझा जाता था और हमारे मेज़र ध्यानचंद, हॉकी के जादूगर.
(Hingor Garhwali Game)

हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है. इस खेल की शुरुआत कहाँ से हुई, इस पर काफी मतभेद हैं. अघिकतर लोग मानते हैं कि फारस में इसकी शुरुआत हुई. इसके बाद ये यूनाान में खेला जाने लगा. बहरहाल, आधुनिक हॉकी की बात करें तो इस पर कोई मतभेद नहीं हैं. 1840 में पहले हॉकी क्लब की स्थापना इंग्लैंड में की गयी थी. क्रिकेट की तरह आधुनिक फील्ड हॉकी भी अंग्रेज ही भारत लेकर आये.

पोलो भी हॉकी से मिलता-जुलता खेल है. इसका आविष्कार भारत में ही हुआ. मुख्य अंतर ये है कि ये घोड़ों पर बैठ कर खेला जाता है. राजा-महाराजाओं का तो ये प्रिय खेल हुआ करता था. गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु तो पोलो खेलते हुए ही हुई थी, लाहौर में. पोलो की शुरुआत भी फारस से हुई मानी जाती है. वहाँ से अरब होकर ये भारत, तिब्बत-चीन तक पहुँचा. मध्यकालीन भारत में इसे चौगान कहा जाता था.

गढ़वाल में भी हॉकी, गोल्फ व पोलो से मिलता-जुलता एक खेल खेला जाता था, जिसे हिंगोड़ कहते हैं. भारत में पोलो मूलतः गिलगित, चित्राल और मणिपुर में खेला जाता था. ब्रिटिश शासन काल में गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों की अलग-अलग अंतराल में, लम्बे समय तक गिलगित, चित्राल, पेशावर में तैनाती रही थी. ऐसा लगता है कि वहीं उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पोलो देखा-सीखा हो. गोल्फ उन्होंने अ्रग्रेजों को खेलते हुए देखा था. सेना के इस अनुभव ने उन्हें भी अपने परम्परागत खेलों को याद करने का अवसर दिया. पोलो और गोल्फ जैसे खेलों में कबड्डी, गिल्ली-डंडा, खोखो से अघिक रोमांच तो था ही.

माघ के महीने खेले जाने वाले गिंदी ( फुटबॉल, रगबी से मिलता-जुलता खेल) जंगल में गायों को चराते हुए खेले जाने वाले हिंगोड़ भी स्मृति-पटल पर रहा होगा. इन्हीं स्मृतियों के साथ हिंगोड़ के स्वरूप में भी कुछ परिवर्तन आया. जंगल में खेला जाने वाला हिंगोड़, पूस के महीने खेतों में खेला जाने लगा. फसल कटाई के बाद खेत खाली रहते ही हैं. खेतों में खेले जाने वाले हिंगोड़ में एक और परिवर्तन ये आया कि खेत के बीच में, गोल्फ की तरह होल बनाया जाने लगा. आकार में ये होल गोल्फ-होल से बड़ा होता था.
(Hingor Garhwali Game)

स्टिक किसी पेड़ की स्टिकनुमा टहनी या जड़ से बनायी जाती थी. जंगल में कई पेड़ों की टहनियां और जड़ें प्राकृतिक रूप से स्टिकनुमा होती हैं. बॉल, पुराने कपड़ों को गोलाकार लपेट कर बनायी जाती थी. हॉकी की तरह हिंगोड़ में गोलपोस्ट नहीं होते थे. टारगेट गेंद को दूर से हिट कर होल में डालना होता था. दो टीम बारी-बारी से गेंद को हिट करती थी. जो टीम अघिक होल कर लेती उसकी जीत मानी जाती.

हॉकी स्टिक बनाने वाली इंग्लैंड की एक पुरानी कम्पनी ए.जी. स्पेलडिंग एण्ड ब्रदर्स के विज्ञापन-पोस्टर में देखा जा सकता है कि स्टिक बनाने में बाँज की लकड़ी का प्रयोग होता था. जाहिर है कि बाँज के जंगल के निकटवर्ती लोग ही इस तरह बाँज की लकड़ी से परम्परागत स्टिक बना कर खेलते रहे होंगे.

1983 में भारत के क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता बनने के बाद क्रिकेट की लहर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक भी फैलने लगी थी. साल 2000 आते-आते तो क्रिकेट का एक नया पहाड़ी संस्करण ही उभर आया था. इसमें बाकायदा अंतरग्रामस्तरीय टूर्नामेंट होने लगे. विजेता टीम को धनराशि के साथ एक बकरा भी दिया जाने लगा. इसी से इन टूर्नामेंट को बकरा-टूर्नामेंट भी कहा जाने लगा. क्रिकेट के इस नये पहाड़ी संस्करण में नियम-कानून भी पूरी तरह स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय किये जाते हैं. जैसे कितने खेतों की दूरी पर चौका-छक्का माना जायेगा. बॉल खो जाने पर क्या किया जायेगा.
(Hingor Garhwali Game)

फारवर्ड शॉर्ट लेग पिच वाले खेत में होगा पर मिड विकेट ऊपर या नीचे के खेत में. अंपायर अगर बाउंड्री की लोकेशन नहीं देख पा रहा है तो वो कुछ दूरी तक शॉट की दिशा में दौड़ कर, बाउंड्री पर बॉल का टप्पा चैक कर सकता है. बॉल किसी पेड़ पर अटक जाए तो हैंडल द बॉल की टक्कर का लोकल नियम लागू होगा. इस संस्करण में साउंड-सिस्टम की पहुँच भी खेतों तक हुई और कुछ युवकों ने बगैर किसी प्रशिक्षण के ही कॉमेंट्री (हिंदी, अंग्रेजी दोनों में) करने में भी विशेषज्ञता हासिल कर ली. बकरा-टूर्नामेंट संस्करण की लोकप्रियता देख जनप्रतिनिधि भी पीछे नहीं रहे. उनकी उपस्थिति में बाकायदा इनऑगरेशन और क्लोजिंग सेरमनी होने लगी. जनप्रतिनिधि फंड से क्रिकेट किट और अन्य पुरस्कार भी दिये जाने लगे. जाड़े के दिनों में खबरों का शीत झेलते अखबारी संवाददाताओं को भी खबरों की हरियाली मिलने लगी.

क्रिकेट के इस पहाड़ी संस्करण को हमने अपनी आँखों से विकसित और अनुकूलित होते देखा है. इस संस्करण को हिल-फ्रैडली-क्रिकेट भी कहा जा सकता है. कल्पना की जा सकती है कि बीसवीं सदी की शुरुआत में हिंगोड़ के आधुनिक संस्करण का विकास भी इसी तरह हुआ होगा. इसमें कोई शक़ नहीं कि हॉकी और गोल्फ के पुरखों में गढ़वाल का हिंगोड़ भी शामिल है. हमें अपने राष्ट्रीय खेल हॉकी की उपलब्धियों पर गर्व है. हमें अपने स्थानीय, पारम्परिक खेल हिंगोड पर अभिमान है. जब तक हॉकी असली ज़मीन पर खेली गयी, हम हॉकी के सरताज़ रहे जबसे उसे नकली ज़मीन पर खेला जाने लगा, मुकाबला हमारे लिए कठिन होता गया. हिंगोड़ जैसी पारम्परिक हॉकी-संस्करण खेलने वाले पर्वतवासी और आदिवासियों के लिए हॉकी के आधुनिक संस्करण की सुविधायें भी उपलब्ध करायी जायेंगी तो कोई कारण नहीं कि निरंतर सोना भारत की झोली में न आ सके.
(Hingor Garhwali Game)

देवेश जोशी

इसे भी पढ़ें: समळौण्या होती सैकोट के सेरों की रोपाई

1 अगस्त 1967 को जन्मे देवेश जोशी फिलहाल राजकीय इण्टरमीडिएट काॅलेज में प्रवक्ता हैं. उनकी प्रकाशित पुस्तकें है: जिंदा रहेंगी यात्राएँ (संपादन, पहाड़ नैनीताल से प्रकाशित), उत्तरांचल स्वप्निल पर्वत प्रदेश (संपादन, गोपेश्वर से प्रकाशित) और घुघती ना बास (लेख संग्रह विनसर देहरादून से प्रकाशित). उनके दो कविता संग्रह – घाम-बरखा-छैल, गाणि गिणी गीणि धरीं भी छपे हैं. वे एक दर्जन से अधिक विभागीय पत्रिकाओं में लेखन-सम्पादन और आकाशवाणी नजीबाबाद से गीत-कविता का प्रसारण कर चुके हैं. 

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

DK88 casino promo code payment methods for Malaysian players

What Is the DK88 Casino Promo Code?How To Claim The DK88 Casino Promo CodeUnderstanding The…

1 day ago

DK88 casino registration security guide for Malaysian players

Why Choose DK88? Licensing, Security and Local AppealStep‑by‑Step DK88 Casino Registration ProcessPreparing Your DocumentsCreating Your…

1 day ago

DK88 Casino Registration Steps and Methods for Malaysian Players

DK88 Casino Registration: Practical Guide for Malaysian Players Welcome to the ultimate walkthrough of DK88…

1 day ago

DK88 casino app mobile guide for Malaysian players

Getting Started: Registration & First StepsVerification and KYCNavigating the DK88 Casino App InterfaceKey Features at…

1 day ago

DK88 Malaysia Casino Bonus Guide: Full Breakdown of Welcome Offers

Why DK88 Malaysia Casino Stands OutRegistration & Getting StartedBonuses & PromotionsGame Selection – Slots, Live…

1 day ago

अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत

आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों…

2 days ago