संस्कृति

पिथौरागढ़ के लंदन फोर्ट में नाटक हट्टमाला के उस पार मंचन

भाव राग ताल नाट्य अकादमी द्वारा आयोजित, ‘मूल लेख बादल सरकार व हिंदी अनुवाद अभिषेक गोस्वामी’ नाटक “हट्टमाला के उस पार” का सफलतापूर्वक सुन्दर मंचन किया गया, कलाकारों द्वारा मनमोहक अभिनय की प्रस्तुति दी गई. (Hatt mala ke us paar Staged at London Fort Pithoragarh)

देर शाम हुए नाटक को देखने के लिए दर्शक डटे रहे. गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में रंगमंच की संस्कृति न के बराबर होने के बावजूद कैलाश कुमार भाव राग ताल अकादमी के बैनर तले लगभग एक दशक से पिथौरागढ़ में थियेटर गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं. अकादमी द्वारा हर साल नाटकों का मंचन किया जाता है. देश के जाने-माने नाट्य दल अकादमी के लिए पिथौरागढ़ आकर नाटक करते हैं. अकादमी से प्रशिक्षित कई छात्र देश के विभिन्न प्रतिष्ठित नाट्य विद्यालयों में दाखिला पा चुके हैं.

नाटक विभिन्न सामाजिक असमानताओं पर कटाक्ष करता है, साथ ही साथ मिलकर काम करके जीवन का आनन्द लेना सीखता है, दर्शकों द्वारा नाटक को बहुत सराहा गया.

नाटक मंचन के साथ-साथ भाव राग ताल “कला सम्मान” 2022 ,से फुन राम, जगत राम, सरस्वती कोहली, महेश बराल को सम्मानित किया गया, जिनका अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य रहे हैं.

लोक कलाकार फुन राम का सम्मान

नाटक का निर्देशन प्रीति रावत द्वारा तथा मार्गदर्शन संस्था के सचिव कैलाश कुमार द्वारा किया गया, नाटक की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपिका बोरा रही, जिनके द्वारा सभी कलाकारों की सराहना की गई साथ ही संस्था को रंगमंच के प्रचार व प्रसार के लिए पूरे उत्तराखंड में जोर देने को कहा गया.

नाटक की मुख्य भूमिका में विकास भट्ट, नरेश भट्ट, वेंकटेश नकुल, जितेंद्र धामी, दीपक मंडल, सौम्या जोशी,सपना,तनुजा गोस्वामी, मनीषा जोशी, मनीषा कोहली, संगीत धीरज कुमार लोहिया वह ढोलक में अंकित कुमार रहे.

टीम सहयोग में विपिन चौधरी, रोमी यादव, मुकेश कुमार रहे, नाटक मंचन में शहर के उत्कृष्ट लोगों द्वारा संस्था को सहयोग दिया गया.

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

2 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

2 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

2 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

2 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

2 weeks ago