जयमित्र सिंह बिष्ट

लोक संस्कृति के आधार स्तंभ थे शिवचरण पांडे

बीते मंगलवार उत्तराखंड लोक संस्कृति के आधार स्तंभ शिवचरण पांडे का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया. शिवचरण पांडे (Shivcharan Pandey)वह नाम है जिन्होंने अल्मोड़ा की रामलीला और होली की परम्परा को बनाये रखने के लिये अपना जीवन लगा दिया. वरिष्ठ रंगकर्मी के निधन पर काफल ट्री के सहयोगी जयमित्र सिंह बिष्ट ने उन्हें इस तरह याद किया- सम्पादक   

स्वर्गीय शिवचरण पांडे अपने सहयोगियों त्रिभुवन गिरी एवं कैलाश भट्ट के साथ सन् 2015 के दशहरे के दौरान खजांची मोहल्ला, अल्मोड़ा बाज़ार में पुरवासी पत्रिका वितरित करते हुए

    

अल्मोड़ा के विश्व प्रसिद्ध दशहरा मेले में आपको एक बुजुर्ग व्यक्ति पिछले कई वर्षों से बेहद साधारण वस्त्रों में अपने एक कंधे में झोला टांगे हुए और उसमें भरी हुई पुरवासी पत्रिका को अल्मोड़ा के बाज़ार में बड़ी आत्मीयता से बांटते हुए अक्सर मिल जाया करते थे.

ख़ास बात यह थी कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की इस प्रमुख पत्रिका पुरवासी का संपादन भी वह पिछले 42 वर्षों से कर रहे थे. साल भर पत्रिका के पीछे स्वयं और अपनी टीम के साथ कड़ी मेहनत कर दशहरा का दिन वह चुनते पुरवासी के अंक के लोकार्पण के लिए, एक अलग ही अंदाज में सीधे अपने झोले से पुरवासी को पाठकों के हाथों में देकर. शायद यह कार्य उन्हें बहुत प्रिय था इतना प्रिय कि अपने पैरों के असहनीय दर्द के बावजूद वह पुरवासी को अपने झोले, अपने दिल से लोगों एक पहुंचाते रहे अपने जाने-जाने तक.

ये बुजुर्ग अब आने वाले दशहरा महोत्सवों में आप को अल्मोड़ा बाज़ार में या फ़िर अल्मोड़ा के लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब में होलियों की बैठकी होली में और विश्व प्रसिद्ध रामलीला में हारमोनियम पर अपनी उंगलियां चलाते और अपने ख़ास अंदाज में गाते हुए अब कभी नजर नहीं आएंगे.

शिवचरण पांडे आज इस दुनिया को अलविदा कह गए, लंबे समय से बीमार थे पर बीमारी के बावजूद उनका हुक्का क्लब से मोह नहीं छूटा वो अपने अंत समय तक हुक्का क्लब की गतिविधियों, चाहे रामलीला मंचन हो या बैठकी होली हो अथवा पुरवासी पत्रिका, से दिल से जुड़े रहे.

यह उनका अल्मोड़ा और उत्तराखंड की संस्कृति कला और साहित्य की दुनिया से अपार प्रेम ही था कि उन्होंने इसके लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया. हुक्का क्लब की अनूठी रामलीला की शुरुआत हर साल उनके मधुर गले से होती जिससे स्तुति गान कर वो दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर देते. होली की बैठकों में भी वो अपनी गायन शैली से रंग भर देते थे. लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब के सभी पदाधिकारी और सदस्यों को वह अपने परिवार से ज्यादा प्यार और दुलार देते. हुक्का क्लब ही उनकी दुनिया थी और दिनचर्या भी, उनका जैसा समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है. उनके जाने से कला जगत और अल्मोड़ा की सांस्कृतिक विरासत को हुए नुकसान की भरपाई बहुत मुश्किल है. उन्हें सादर नमन.

जयमित्र सिंह बिष्ट
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: बधाणगढ़ी से हिमालय के दृश्य

काफल ट्री का फेसबुक पेज : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन

पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…

5 days ago

कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा

बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ…

3 weeks ago

दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है

हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन इन्हीं दिनों यानी जून के तीसरे-चौथे हफ़्ते में सलीके…

3 weeks ago

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

1 month ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

1 month ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

1 month ago