Featured

कल हरेला है

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree

मानो जैसे कल की ही बात होगी जब परदेश में पोस्टमैन अपने झोले से चिट्ठी निकाल कर देता. सरकारी मोहर के साथ लगे हल्के टीके वाली चिट्ठी देख शायद पोस्टमैन भी समझ लेता होगा कि चिट्ठी घर से आई है. चिट्ठी जिसके भीतर रहता हरी पत्ती का लम्बा टुकड़ा. बरसों से परदेश में रहने वाले जानते हैं घर से आई चिट्ठी में यह हरी पत्ती का लम्बा टुकड़ा महज हरी पत्ती का टुकड़ा नहीं है. दूर पहाड़ से आया यह हरी पत्ती का टुकड़ा अपनी जमीं से आया आशीर्वचन हैं हरेला का आशीर्वचन –
(Harela Festival 2023)

लाग हरैला, लाग बग्वाली
जी रया, जागि रया
अगास बराबर उच्च, धरती बराबर चौड है जया
स्यावक जैसी बुद्धि, स्योंक जस प्राण है जो
हिमाल म ह्युं छन तक, गंगज्यू म पाणि छन तक
यो दिन, यो मास भेटने रया

ऐसा नहीं है कि आज के समय में पहाड़ियों ने हरेला पर्व भुला दिया है. सुबह से ही लोगों के मोबाईल घनघनाने लगते हैं. एक से एक फोटो वीडियो गीत के साथ हरेले की शुभकामनाएं आती हैं. पहाड़ियों के फेसबुक वाल हरेला की शुभकामनाओं से भरे रहते हैं.
(Harela Festival 2023)

पहाड़ का आदमी हरेला को अपनी पहचान से जोड़कर देखता है. सोशियल मिडिया का इस बात के लिये तो शुक्रगुजार होना होना ही चाहिये कि भले फोटो के लिये ही सही पहाड़ियों के घर में अब फिर से हरेला उगाया जाने लगा है. अब तो सरकार तक हरेला को बतौर पहाड़ी पर्यावरण दिवस मनाती है. एक दौर ऐसा भी था जब हरेला के दिन छुट्टी पर बहस हुआ करती थी.

आज के समय शायद ही कोई परिवार ऐसा बचा हो जो घर से दूर रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों को डाक से हरेला की आशीष भेजता होगा. हां कुछ अनपढ़ और गंवार कहे जाने वाली ईजा और आमा जरूर हैं जो गाड़ी वालों के हाथ मैदानी इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिये हरेला का आशीष भेजती हैं. नये बच्चों के लिये यह एक झंझट है. एक ऐसा झंझट जो अक्सर मैदान और पहाड़ के बीच चलने वाली गाड़ियों के बोनट पर सूखा पड़ा हुआ मिल जाता है. फ़िलहाल तो बात इतनी है कि कल हरेला है.
(Harela Festival 2023)

काफल ट्री फाउंडेशन

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

2 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

2 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

3 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

3 weeks ago