Featured

1987 में देश की राजधानी में छोलिया नृत्य – वीडियो

यह साल 1987 के फरवरी माह की 19 तारीख़ को रिकार्ड किया गया वीडियो है. यह वीडियो एक कुमाऊनी नाटक का हिस्सा है. नाटक का नाम था ऋतुरैण. ऋतुरैण नाटक का यह मंचन देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था. आजाद भवन में मंचित यह नाटक करीब डेढ़ घंटे का था. नाटक का मंचन करने वाली संस्था का नाम था – कुमाऊं कला संगम.
(Old Chholiya Video Kumaon)

कुमाऊं कला संगम के कलाकारों द्वारा मंचित नाटक ऋतुरैण की कहानी भाई और बहिन के प्रेम की अमर कहानी है. इस नाटक में कुमाऊं की परम्पराएँ भी खूब देखने को मिलती हैं. नाटक में विवाह के बाद वर-वधु का स्वागत छोलिया नृत्य से होता है तो भिटौली भी नाटक का एक हिस्सा है. ऋतुरैण नाटक में कुमाऊनी गीत भी गाये जाते हैं.

छोलिया कुमाऊं का सबसे जाना-माना लोक नृत्य है. नृत्य की यह परम्परा एक से दो हज़ार वर्ष पुरानी बताई जाती है. यह वीडियो नायक-नायिका के विवाह के बाद छोलिया नृत्य से जुड़ा है. वीडियो में वर और वधु के सामने दो छोलिया नृतक शारीरिक कौशल दिखा रहे हैं. माना जाता था कि पुराने समय में छोलिया नृत्य का आविष्कार संभवतः राजपरिवारों के मनोरंजन के लिए हुआ होगा.
(Old Chholiya Video Kumaon)

      .          

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

पहाड़ का वह बूढ़ा पिता

पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…

5 days ago

कुमाऊं में रामलीला की परम्परा

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…

1 week ago

‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…

जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…

1 week ago

हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें

उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…

1 week ago

‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है

लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…

2 weeks ago

धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’

पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…

2 weeks ago