सुधीर कुमार

नाटक: ‘बड़े भाई साहब’ की झलकियाँ

मैं पढ़ रही हूं, क्या?
नहीं पता.
क्यों? ये भी नहीं पता.
मगर मैं पढ़ रही हूं.
(Glimpses Bade Bhai Saheb)

कुछ ऐसे ही सवाल जो हर समय काल में हर विद्यार्थी के मन में उठते हैं और जिनके जवाब वह ढूंढना चाहता है या ढूंढने की कोशिश भी करता है, लेकिन उसे मिल पाते भी है या नहीं. कोई नहीं जानता. क्योंकि समाज कभी इनके जवाब नहीं देता, सिर्फ कहता है पढ़ो.

इन्हीं सवालों को उठाता है नाटक “बड़े भाई साहब.” काफल ट्री फाउंडेशन द्वारा रमोलिया हाउस में कल शाम 5 बजे मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी के नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का आयोजन किया गया. इस दिन शाइनिंग स्टार स्कूल, रामनगर ने इस नाटक का पच्चीसवां शो पेश किया.

कहते हैं अगर छोटी कोशिशें भी ईमानदारी और लगन के साथ की जाएँ तो वे बड़ी बन ही जाती हैं. तूषिता नेगी, कृतिका राणा और इशिता यूँ तो शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल की छात्राएं हैं लेकिन उन्होंने अपने बेजोड़ अभिनय से स्टूडियो में मौजूद दर्शकों को नाटक के मोहपाश में जकड़ दिया. अभिनय इतना जीवंत था कि सीमित साधनों में की गयी इस प्रस्तुति के बीच हॉल में बैठे दर्शकों के बीच गहरी चुप्पी पसरी हुई थी. मंत्रमुग्ध दर्शक कई दफ़ा तालियाँ बजाने को भी मजबूर हुए. लगभग सभी दर्शकों ने महसूस किया कि वे तूषिता, कृतिका और इशिता के साथ अपने स्कूली दिनों की यात्रा पर निकल पड़े हैं. इधर दर्शक नाटक में डूब कर मंच पर पहुँच जा रहे थे तो नाटक के किरदार ख़ुद दर्शकों के बीच पहुँच कर उन्हें भी नाटक का हिस्सा बना ले रहे थे. दीक्षांत स्कूल के प्रबंधक समित टिक्कू ने कहा की वे नाटक की शुरुआत में ही अपने स्कूली दिनों की यात्रा पर निकल पड़े थे.     

प्रस्तुत नाटक में मूल कहानी की आत्मा को बनाए रखते हुए रटंत शिक्षा प्रणाली की पड़ताल करने की कोशिश की गयी. नाटक प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ के कथ्य की उँगलियाँ थामे ही आगे बढ़ता जाता है. कहानी में बड़ा भाई पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा परेशान हो कर और छोटा भाई खेलकूद में मगन अपनी जिंदगी को जीता हुआ आस-पास घट रही चीजों से भी सीखता है. एक भाई लगातार फेल होता जाता है और दूसरा पास.

इसी कहानी का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया था तीन छात्राओं ने. तीनों नन्हीं अभिनेत्रियों ने साबित किया की अगर कहानी दमदार हो और अभिनय जीवंत तो बड़ी कास्ट वाले नाटकों से भी ज्यादा तिलिस्म मंच पर रचा जा सकता है. नाटक के अंत में दर्शकों ने नाटक की अभिनेत्रियों के साथ बातचीत भी की. वरिष्ठ रंगकर्मी खीम सिंह रावत ने कहा कि नाटक में नुक्स हमेशा ही निकाला जा सकता है लेकिन इस नाटक के सभी पक्ष बेहद शानदार रहे और निर्देशक, अभिनेत्रियाँ सभी बधाई और तालियों के हकदार हैं.

मुंशी प्रेमचंद लिखित इस कहानी के नाट्य रूपांतरण के निर्देशक थे अमित तिवारी. प्रमुख कलाकार थे— तूषिता नेगी, कृतिका राणा और इशिता. पेश हैं नाटक की कुछ तस्वीरें.

-सुधीर कुमार

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