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कारगिल में शहीद लांसनायक चंदन सिंह भंडारी की प्रतिमा लगाने तक को जगह नहीं

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यह 1999 का बरस था. आर्मी एयर डिफेन्स में तैनात चंदन सिंह भंडारी को छुट्टी आये 10 दिन ही हुए थे कि सेना से बुलावा आ गया. इसके बाद परिवार को चंदन सिंह भंडारी के परिवार को उनकी शहादत की ही खबर मिली. शहादत के पीछे छोड़ गये अपने तीन छोटे बच्चे, माता-पिता और पत्नी.
(Chandan Singh Bhandari)

आज जब पूरे देश में विजय दिवस मना रहा है तब वहीं वीर चंदन सिंह भंडारी की प्रतिमा लगाने के लिये जगह नहीं है. कैसी विडम्बना है कि देश के लिये शहीद होने वाले वीर जवान की प्रतिमा को उसके उद्धाटन के दिन ही हटा दिया जाता है. वीर चंदन सिंह भंडारी का परिवार पिछले दो सालों से उनकी प्रतिमा लिये घूम रहा है पर कोई सुनने वाला नहीं.

दैनिक अख़बार हिन्दुस्तान में छपी हिमांशु कुमार लाल की एक रिपोर्ट अनुसार दो वर्ष पूर्व सेना के अधिकारियों ने उनके घर आकर उन्हें उनके पति की प्रतिमा सौंपी थी. प्रदेश के एक मंत्री ने उनके पेट्रोल पंप पर प्रतिमा का उद्घाटन किया लेकिन पेट्रोलियम कंपनी की आपत्ति के बाद उसी दिन प्रतिमा को हटाना पड़ा.  
(Chandan Singh Bhandari)       

रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद वीर चंदन सिंह भंडारी की प्रतिमा अगले दो वर्ष पेट्रोल पम्प में ही रखी रही. प्रतिमा को लगाने के लिये कई मंत्रियों को ज्ञापन दिया गया कई बार पंप के उच्च अधिकारीयों से बात की गयी पर बात न बनी.

बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब परिवार को किसी तरह की मदद न मिली तो डेढ़ महीने पहले परिवार वीर चंदन सिंह भंडारी की प्रतिमा को अपने घर ले आया. 20 अगस्त 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में वीरगति को प्राप्त हुए वीर चंदन सिंह भंडारी मूलरूप से बेतालघाट सिमलखा गांव के रहने वाले थे.
(Chandan Singh Bhandari)  

दैनिक अख़बार हिन्दुस्तान में छपी पूरी रपट यहां पढ़ें –
शहीद लांसनायक चंदन सिंह भंडारी की प्रतिमा लगाने तक को जगह नहीं

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  • देश के अमर शहीद के साथ इस तरह की खबर बहुत निराशाजनक है।

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