समाज

200 साल पहले ऐसा दिखता था चम्पावत

कुमाऊं के सबसे पुराने शहरों में एक शहर है चम्पावत. काली कुमाऊं की राजधानी के रूप में जाना जाने वाला यह शहर हमेशा से इस क्षेत्र की राजनीति के केंद्र में रहा. चम्पावत के किले और शहर की यह पेंटिंग 1815 में कैप्टन हैदर यंग हेयरसे द्वारा बनाई गयी. 206 साल पुरानी इस पेंटिंग में चम्पावत के किले के अतिरिक्त शहर के बसावट देखी जा सकती है.
(Champawat Old Paintings)

हैदर यंग हेयरसे ने यह पेंटिंग गोरखा और अंग्रेजों के बीच हुई लड़ाई के बाद बनाई थी. वह इससे पहले कुमाऊं और गढ़वाल की दो बेहद महत्वपूर्ण यात्राएं कर चुका था. जिस समय लार्ड मोयरा ने कुमाऊं पर आक्रमण किया तब हैदर यंग हेयरसे भी एक छोटी अनियमित सेना की कमांड संभाल रहा था.

यह संभव है कि जब मार्च 1815 में चम्पावत पर अंग्रेजों का कब्जा हुआ उसके बाद हैदर यंग हेयरसे ने इस पेंटिंग को बनाया है. इस पेंटिंग के साथ दर्ज जानकारी में चम्पावत को काली कुमाऊं का एक मुख्य शहर बताया गया है.
(Champawat Old Paintings)

इस बात में कोई दोराय नहीं कि कुमाऊं में बसे सभी शहरों में चम्पावत सबसे पहले व्यवस्थित ढंग से बसा शहर था. कुमाऊं के इतिहास में चम्पावत सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है. शोध की कमी के चलते कुमाऊं के इस सबसे प्रमुख नगर के इतिहास के कई पहलू आज भी अनछुए रह गये हैं. चम्पावत जिले के किले और शहर की यह पेंटिंग ब्रिटिश लाइब्रेरी से ली गयी है.
(Champawat Old Paintings)

चम्पावत का किला और शहर. तस्वीर: ब्रिटिश लाइब्रेरी

काफल ट्री डेस्क

संदर्भ: ब्रिटिश लाइब्रेरी

इसे भी पढ़ें: 150 साल पहले ऐसा दिखता था अल्मोड़ा बाज़ार

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

2 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

2 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

2 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

2 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

2 weeks ago