स्मृति शेष : मेरी यादों में शमशेर
काफल ट्री के नियमित लेखक, उत्तराखण्ड पुलिस में कार्यरत प्रमोद साह ने अपने छात्र जीवन तथा उसके बाद की डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट से जुड़ी स्मृतियाँ साझा की हैं. आज सुबह-सुबह अल्मोड़ा से जब यह मनहूस ख... Read more
लखनऊ में बर्लिंगटन चौराहे से केसरबाग को जाने वाली सड़क पर ओडियन सिनेमाघर से कुछ आगे, बाएं हाथ की तरफ कालीबाड़ी नाम का पुराना मुहल्ला है. वहां काली का पुराना मंदिर होने से यह नाम पड़ा. कालीबाड़ी... Read more
अलविदा डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट
उत्तराखण्ड के जनसंघर्षों के प्रतीक डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का आज प्रातः अल्मोड़ा में निधन हो गया है. वह लम्बे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. मूलतः खटल गाँव स्याल्दे निवासी डॉ. शमशेर सिंह बिष्टका ज... Read more
गुप्त वंश तथा कुमाऊं भाग-2
कर्तृपुर(कत्यूर):- समुद्रगुप्त के इलाहाबाद के अशोक स्तम्भ पर खुदी हुयी हरिषेण की प्रषस्ति में पराजित राजाओं में कर्तपुर का नाम नेपाल के बाद लिया गया है. इसलिये इतिहासकारों ने इसे कार्तिकेयपु... Read more
गाबो और उनकी शकीरा
आज से करीब सोलह साल पहले अंग्रेज़ी अख़बार ‘द गार्जियन’ ने शनिवार 8 जून 2002 को नोबेल विजेता गाब्रिएल गार्सीया मारकेज़ का यह आलेख प्रकाशित किया था. शकीरा के संगीत ने तमाम लातीन अमरीक... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 2
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 1) गडोलिया गांव से निकलते समय बांध के पानी के उस पार देखा. वहां पहाड़ की गोद में खंडहर हुआ गांव उभर आया था. माचिस के डिब्बों जैसे टूटे मका... Read more
अंग्रेजी शासन के ताबूत पर आखिरी कील
1857 के बाद फरवरी 1946 पहला मौका था जब भारतीय सेना ने ब्रिटिश शासन के विरुध्द खुलकर अपना रोष और असंतोष व्यक्त किया. इतिहास में यह विद्रोह भारतीय नौसेना विद्रोह नाम से दर्ज है. उत्तराखण्ड से... Read more
देहारादून में दून अस्पताल के फर्श पर बच्चे को जन्म देने वाली प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गयी. यह उसी देहारादून में हुआ, जहां एक तरफ विधानसभा का सत्र चल रहा था. विधानसभा में एक दिन... Read more
1977 की कॉमिक्स के विज्ञापन
हमारे ज़माने में तो ऐसा होता था… वाक्य भारत का ध्येय वाक्य घोषित किये जाने की क्षमता रखता है. आदमी 25 पार का हुआ नहीं उसका ज़माना बन जाता है. जैसे इन दिनों भारत में नाइंटीज का नोस्टाल्जि... Read more
अल्मोड़ा में मोहर्रम के ताजिये
अल्मोड़ा में पिछले कई दशकों से मुहर्रम के अवसर पर ताज़िये बनाये जाते हैं जिसे अंजुमन सेवा समिति द्वारा आयोजित किया जाता है. ये ताज़िये बेहद कलात्मक और सुंदर होते हैं जिनके अंदर तरह-तरह लाइट्स भ... Read more


























