सूरज की मिस्ड काल – 6
सूरज भाई गुलगपाड़ा सुनकर गर्मा गये आज सुबह जरा जल्दी जग गये. सूरज भाई का इन्तजार करते उधर देखते रहे जिधर से उनका आगमन होता है. सबसे पहली नजर से कोमल लालिमा देखकर लगा कि उगते सूरज को चारों दिश... Read more
लोकगायिका स्व. कबूतरी देवी उत्तराखंड की ऐसी पहली गायिका हैं जिन्होंने रेडियो के जमाने में खूब नाम कमाया. किसी पहाड़ी सफर की तरह उनकी जिंदगी में भी खूब सारे उतार-चढ़ाव आए. ‘उत्तरा’... Read more
कुतर्की समय में कुछ तार्किक बातें
यह 2011 साल का सितम्बर महीना था जब जबलपुर से निकलने वाली प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ ने दो दिन की सिनेमा कार्यशाला ‘प्रतिरोध का सिनेमा अभियान’ के साथ मिलकर आयोजित की थी. प्रतिरो... Read more
गट्टू भाई की दानवीरता
एक क़स्बे के लिहाज़ से गट्टू भाई ख़ासे पैसे वाले थे और पुराने नवाबों की फ़ितरत रहते थे. उसी हिसाब के उनके शौक और खर्चे भी थे. आज से पच्चीस-तीस साल पहले के बखत के हल्द्वानी शहर में जब ठीकठाक ज़िंद... Read more
खटारा मारुति में पूना से बागेश्वर – 3
(पिछले हिस्से: खटारा मारुति में पूना से बागेश्वर -1, खटारा मारुति में पूना से बागेश्वर -2) गाड़ी सड़क से उतार कर कच्चे में खड़ी की. लगा कि शायद गरम होने से बन्द हो गई. काफ़ी देर बोनट खोलकर इन्त... Read more
कालिदास की कल्पना का रहस्य लोक उत्तराखण्ड
राजधानी के चहल-पहल भरे वातावरण में आपाधापी, दौड़ धूप, भीड़-भाड़ और शहरी प्रदूषण की बीच जब कभी मन कल्पना के पंख लगाकर सुदूर कुमाऊं की पहाड़ियों में उड़कर पहुंचता है तो मन को कितनी शांति मिलती है,... Read more
सुना आपका ‘ता’ गायब हो गया था पिछले दिनों
नेतृत्व की ताकत -शरद जोशी नेता शब्द दो अक्षरों से बना है- ‘ने’ और ‘ता’. इनमें एक भी अक्षर कम हो तो कोई नेता नहीं बन सकता . मगर हमारे शहर के एक नेता के साथ एक अजीब ट्र... Read more
गेलिक भाषा में एक शब्द होता है – “usquebaugh”, जिसका अर्थ हुआ “जीवनजल”. ध्वनि के आधार पर यह शब्द कालान्तर में “usky” बन गया. जब अंग्रेज़ी भाषा ने इसे... Read more
भारत के अलग-अलग भागों में मंचन की जाने वाली रामलीलाओं में एक मुख्य समानता महिलाओं की सीमित भागीदारी होती है. रामलीला में महिला पात्र के किरदार तक पुरुषों द्वारा ही किये जाते हैं. लेकिन इसी व... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने – 18
आजादी के बाद और कुछ हुआ हो या ना हो मैं कोई नहीं जानता था जिन्हें कोई नहीं जानता था वह ऊंची सीढ़ियां चढ़ गए. लेकिन जो आजादी के लिए दीवानगी की हद तक पार कर गए उनकी स्मृतियां तक मिट गई हैं. हल... Read more


























