उत्तराखंड की सबसे दानवीर महिला की कहानी
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree कुमाऊं के दो पुराने अश्व मार्ग काठगोदाम-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ और टनकपुर-चम्पावत-पिथौरागढ़ साठ के दशक तक आम लोगों द्वारा खूब प्... Read more
फील्ड मार्शल मानेकशॉ से सीखो सच्ची लीडरशिप
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree फील्ड मार्शल मानेकशॉ का नाम जुबान पर आते ही आंखों के सामने शारीरिक रूप से एक चुस्त-दुरुस्त और मानसिक रूप से एक बेहद सजग रहन... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पिछली अमावस्या सहित कार्तिक मास का पूरा शुक्ल पक्ष, 41 मजदूर सिलक्यारा की निर्माणाधीन सुरंग में फँसे रहे. दीपावली, छट और इग... Read more
कुणाल तुम आजाद ही हुए : श्रद्धांजलि
वैसे तो कुनकुन (कुणाल तिवारी) से मेरा परिचय बचपन से ही रहा पर याराना माउंटेन राइडर्स साइक्लिंग ग्रुप बनने के बाद और भी पक्का हो गया. अपने स्मृति पटल को उकरते हुए याद आती है बचपन के दिनों की... Read more
इगास से जुड़ी एक कथा
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पहाड़ का जीवन कृषि आधारित रहा है. कृषि के लिये पहाड़ी न जाने कितने बरसों से पशुओं पर निर्भर रहे. अपने आंगन में पशुओं से बात... Read more
आज बूढ़ दीवाली है
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree परम्परागत रूप से कुमाऊं क्षेत्र में दीवाली तीन बार मनाई जाती है. तीनों के नाम क्रमशः कोजागर, महालक्ष्मी और बूढ़ दीवाली. पौर... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree इगास पर्व पर ‘भैलो रे भैलो काखड़ी को रैलू, उज्यालू आलो अंधेरो भगलू’ लोकगीत गाते हुए, भैलो खेलते, गोल-घेरे में घूमते हुए स्त... Read more
डूबता शाम का सूरज पिथौरागढ़ से : फोटो निबंध
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय करीब 2000 बरस पहले बनी एक घाटी में स्थित है. पूरब में सुवाकोट, पश्चिम में ह्यूँपानी, उत्तर में सौड़... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree जब हम असभ्य थे, मूर्ख थे तब हम प्रकृति का सम्मान करते, उसे पूजते और प्रकृति सम्मत जीवन जी रहे थे. अब सभ्य हैं ज्ञानवान हैं... Read more
पहाड़ियों में इन महीने ही क्यों होती है शादी
पहाड़ियों में बरस के बारह महीने शादी नहीं होती. एक वर्ष के बारह महीनों में कुछ ऐसे महीने तय हैं जिनमें विवाह होता है. मसलन मंगसीर, माघ और फागुन के पूरे महीने में शादियां हुआ करती हैं लेकिन स... Read more


























