तैमूर लंग की आपबीती
“मैं उल्लू की आवाज़ को अशुभ नहीं मानता, फिर भी इस आवाज़ से अतीत और भविष्य की यादों में खो जाता हूं. जब भी रात को उल्लू की आवाज़ सुनता हूं, लगता है दुनिया के अतीत का इतिहास मेरी आंखों क... Read more
हमारे बच्चों के लिए गांव के वीडियो ‘वाऊ फैक्टर’ हैं लेकिन उनके सपनों में जुकरबर्ग और एलन मस्क की दुनिया है
ताले में चाभी थोड़ी मुश्किल से घूमी. करीब दस महीने बाद मैं ‘अपने घर’ का तालाखोल रहा हूं. 2023 की तीस जून को यहां आकर दो जुलाई को वापस गया था. आज दस मई 2024 है. हमें देखकर लंगूरों का यूथ अचम्... Read more
मेले से पिछली रात ऐसा दिखा कैंची धाम
उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले का कैंची धाम हाल के वर्षों में आम लोगों के बीच एक बड़े आस्था और विश्वास के केंद्र के रूप में लोकप्रिय हुआ है. आम और नामचीन लोगों के बीच प्रसिद्ध बाबा नीब करौली के... Read more
कमल जोशी की फोटोग्राफी में बसता पहाड़
स्वतंत्र फोटोग्राफर पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट स्व. कमल जोशी की फोटोग्राफी में पहाड़ का जीवन, दर्द वहां की परंपराएं और पहाड़ में हो रहे बदलावों की झलक दिखती थी. उनकी पहाड़ और हिमालय की यात्र... Read more
आज मनाया जाता है दसौर यानी गंगा दशहरा पर्व
पहाड़ों में इसे दसार या दसौर भी कहते हैं. दसार या दसौर यानी गंगा दशहरा. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस पर्व की खूब मान्यता है. इस वर्ष गंगा दशहरा 16 जून को पड़ रहा है. कुमाऊं क्षेत्र के ह... Read more
हरिद्वार के हर की पैड़ी स्थित कुशा घाट में स्वतन्त्र लेखिका रही रीता खनका रौतेला का वार्षिक तिथि श्राद्ध उनकी बेटी हर्षिता रौतेला ‘बुलबुल’ ने किया. तीन साल तक कैंसर से लड़ने के ब... Read more
भोट-तिब्बत व्यापार में दोस्ती और जुबान की कीमत
तिब्बत में भोटान्तिकों का व्यापार वहां की अनेकानेक मंडियों में होता था. इनमें मुख्य तकलाकोट, ज्ञानिमा, गरतोक, चकरा, शिवचिलम, ख्युंग लिङ्ग, दरचेन, कुंलिङ्ग, थुलिङ्ग, पुंलिङ्ग, नावरा, लामा छोर... Read more
आओ मिलकर अपनी धरती को बचाएं
धरती मां ट्रस्ट ने द्वारा पर्यावरण संस्कृति उत्सव का आयोजन प्राथमिक विद्यालय ससबनी मुक्तेश्वर में किया गया. कार्यक्रम में सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. धरती मां ट्रस्ट के अध्य... Read more
खटारा मारुति में पूना से बागेश्वर
यह 2007 की बात है. दिन-वार ठीक से याद नहीं. अक्टूबर का महीना था. उन दिनों रामलीला(एं) चल रही थीं. अल्मोड़ा से तीन जने दिल्ली के लिए रवाना हुए – बागेश्वर से केशव, अल्मोड़ा से रज्जन बाबू और मै... Read more
पहाड़ में लड़के का परदेश जाना बेटी की विदाई से कम नहीं होता था. जो लोग हमारी उमर के हैं या बड़ी उमर के हैं या अब भी जो लड़के गांव से नौकरी के लिए जाते हैं सबको लगभग यही शिक्षा मिलती हैं. जिस-... Read more


























