ऋषिकेश मुखर्जी की कालजयी फिल्म: किसी से न कहना
ऋषिकेश मुखर्जी, दिलचस्प और जीवंत सिनेमा के फन मे माहिर सिनेकार रहे हैं. उनकी फिल्मों में बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में सांस्कृतिक विमर्श तो रहता ही था, साथ ही उसमें एक गहरा संदेश भी निहित होता... Read more
गांधीजी ने जिस फिल्म को सराहा
हिंदी सिनेमा में ‘अछूत कन्या’ का ऐतिहासिक महत्त्व है. छुआछूत के विरोध में बनी यह पहली फिल्म थी. बाम्बे टॉकीज’ निर्मित और फ्रैंज ऑस्टन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में देविका रानी को सौन्दर्य के... Read more
हत्यारे ही सूत्रधार हैं ‘सेक्रेड गेम्स’ में
‘वो बात सारे फ़साने में जिसका ज़िक्र न था’, वो बात ये है कि सेक्रेड गेम्स (Sacred Games) नाम की वेब सीरीज़ के सीज़न वन के आठ एपिसोड जाने अनजाने एक समुदाय की बैशिंग की एक समांतर पटकथा को फ़ॉल... Read more
हिन्दी सिनेमा में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने एक बेहतरीन अभिनेता के तौर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. उनके द्वारा अभिनीत फिल्मों में ब्लैक फ्राइडे (2004), न्यू यॉर्क (2004), पीपली लाइव (2009), क... Read more
एक ज़माना था जब कादर खान को एक फिल्म लिखने के अमिताभ बच्चन से ज़्यादा पैसे मिलते थे. सत्तर और अस्सी के दशक में कादर खान के बिना किसी सुपर हिट फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. दुर्भाग्य क... Read more
समूचा हिंदुस्तान नजर आता है ‘बावर्ची’ फिल्म में
बावर्ची (1972) विघटित होते पारिवारिक मूल्यों की पुनर्स्थापना को लेकर आई एक नए मिजाज की फिल्म थी. तब के दौर के हिसाब से यह फिल्म, एक बिल्कुल नये विषय को लेकर आई. ऋषि दा की फिल्मों के विषय आम... Read more
देश में बनी पहली गढ़वाली फिल्म थी ‘जग्वाल’
बृहस्पतिवार, 4 मई 1983 का दिन. दिल्ली का रफ़ी मार्ग सैकड़ों की भीड़ से अटा हुआ था. रफ़ी मार्ग में स्थित मावलंकर आडिटोरियम के बाहर लोगों में टिकट लेने को लेकर होड़ लगी थी. मावलंकर आडिटोरियम के बाह... Read more
सिनेमा: फिल्म निर्माण में एक सफल प्रयोग की कहानी
आज जब हम इंटरनेट पर जॉन अब्राहम के नाम से खोज शुरू करते हैं तो सबसे पहले 1972 में पैदा हुए केरल के बॉलीवुड़ी अभिनेता जॉन अब्राहम के बारे में जानकारी मिलती है. थोड़ी सी मशक्कत के बाद थोड़े पुरान... Read more
वन्स अगेन – फिल्म रिव्यू
किसी भी एहसास पर कला का प्रदर्शन बेहद कठिन काम है फिर अगर एहसास प्यार हो तो काम और कठिन हो जाता है. बालीवुड में प्यार को लेकर हर हफ्ते एक फिल्म बनती है लेकिन आप उंगलियों में उन फिल्मों को गि... Read more
सिनेमा: पांच मिनट में सत्रह देशों की दुनिया
एन वुड द्वारा 1984 में स्थापित टीवी कंपनी रैगडौल से सीख मिलती है कि एक अच्छा प्रोग्राम कैसे और कितनी मेहनत से बनाया जाता और फिर यह भी कि प्रोग्राम बनाने में रुपये पैसे के अलावा दिल भी लगाना... Read more



























