भारतवर्ष में सर्वप्रथम सन् 1921 ई० में “जयहिन्द” नारे का उद्घोष करने वाले महान देशभक्त श्री रामसिंह धौनी का जन्म 24 फरवरी सन् 1893 ई० में अल्मोड़ा जिले के तल्ला सालम पट्टी में तल... Read more
अस्पताल की कमी से जूझता उत्तराखण्ड का एक गांव
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 21वीं सदी के डिजिटल इंडिया में ऐसा भी एक गांव है, जहां बीमार मरीज़ के पेट के दर्द को दूर करने के लिए लोहे की गर्म छड़ का इस्तेमाल किया जाता हैं. इसके अतिरिक्त कई... Read more
उत्तराखण्ड की सीमान्त जोहार घाटी में मिलम के करीबी गांव जलथ में रहने वाले प्रयाग रावत बचपन से ही हिमालय और प्रकृति के प्रेमी हैं. खुद को हिमालय पुत्र कहने वाले प्रयाग रावत के जीवन के शुरुआती... Read more
मो. सलीम: पहाड़ को आवाज देता चित्रकार
भारत के महान समकालीन चित्रकार मो. सलीम का बीते शनिवार को निधन हो गया, वो 83 साल के थे. भारत के मूर्धन्य चित्रकार मो. सलीम का जन्म 5 जुलाई 1939 में अल्मोड़ा के एक साधारण परिवार में हुआ था, उन... Read more
बात 1576 की है पर्शिया के एक परिवार ने हिन्दुतान की राह पकड़ी क्योंकि उन्हें शाह इस्माईल के राज्य में तंगहाली में दिन बिताने पड़ रहे थे और हिन्दुस्तान में उस वक़्त एक नेकदिल बादशाह की हुकूमत... Read more
रास बिहारी बोस का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सर्वाधिक समय तक सक्रिय रहने वाले क्रांतिकारियों में है. रास बिहारी बोस से जुड़ी पहली सबसे महत्वपूर्ण घटना हार्डिंग बम काण्ड है.... Read more
उत्तराखंड के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है आज
देश की आजादी के पांच महीने बाद, जनता के शासन की मांग करना और इस मांग के लिए शहादत होना, सुनने में कुछ अजीब सा लगता है. लेकिन उत्तराखंड की तत्कालीन टिहरी रियासत में 11 जनवरी 1948 को दो नौजवान... Read more
‘ह्यून’ पहाड़ों में सर्दी का मौसम
ह्यून यानि कि सर्दी का मौसम. पहाड़ों के मुख्य तीन मौसम – रूड़, चौमास, ह्यून में सबसे अच्छा मौसम ह्यून का ही होता है. हालांकि इस मौसम में कुछ जटिलतायें भी हैं. मंगसीर, पूस और माघ का महि... Read more
2 सप्ताह से सूखीढांग इंटर कॉलेज के भोजनमाता प्रकरण में आखिरकार शासन द्वारा दलित भोजन माता सुनीता देवी की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान कर दी गयी. सूखीढांग इंटर कॉलेज में सीईओ आरसी पुरोहित की अ... Read more
मैं अपनी वार्षिक परीक्षाएं पास करके घर में अपने ग्रीष्म अवकाश का आनंद ले रहा था. आखिर आनंद लिया भी क्यों ना जाए, पूरे वर्ष की माथा पच्ची के बाद किताबों और भारी-भरकम बस्ते से छुटकारा जो मिला.... Read more



























