बचपन में मिले अभावों की एक खूबी है कि वे बच्चे को जीवन की हकीकत से मुलाकात कराने में संकोच या देरी नहीं करते. घनघोर आर्थिक अभावों में बीता बचपन जिंदगी-भर हर समय जीवनीय जिम्मेदारी का अहसास दि... Read more
मो. सलीम: पहाड़ को आवाज देता चित्रकार
भारत के महान समकालीन चित्रकार मो. सलीम का बीते शनिवार को निधन हो गया, वो 83 साल के थे. भारत के मूर्धन्य चित्रकार मो. सलीम का जन्म 5 जुलाई 1939 में अल्मोड़ा के एक साधारण परिवार में हुआ था, उन... Read more
बात 1576 की है पर्शिया के एक परिवार ने हिन्दुतान की राह पकड़ी क्योंकि उन्हें शाह इस्माईल के राज्य में तंगहाली में दिन बिताने पड़ रहे थे और हिन्दुस्तान में उस वक़्त एक नेकदिल बादशाह की हुकूमत... Read more
रास बिहारी बोस का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सर्वाधिक समय तक सक्रिय रहने वाले क्रांतिकारियों में है. रास बिहारी बोस से जुड़ी पहली सबसे महत्वपूर्ण घटना हार्डिंग बम काण्ड है.... Read more
विपरीत परिस्थितियों में भी उत्तराखण्ड की कई महिलाओं ने राष्ट्रीय पटल पर सशक्त हस्ताक्षर किये हैं. इनमें से एक हैं चंद्रप्रभा ऐतवाल. चंद्रप्रभा 24 दिसंबर 1941 को उत्तराखण्ड के सीमान्त जिले के... Read more
आज पहाड़ के गांधी का जन्मदिन है
इन्द्रमणि बडोनी का जन्म टिहरी गढ़वाल जिले के अखोड़ी गांव (घनसाली) में 24 दिसम्बर 1924 को हुआ था. उनके पिताजी का नाम सुरेशानंद बडोनी और माँ का नाम कालू देवी था. यह एक बहुत ही गरीब परिवार था.... Read more
2021 में फिल्म फेयर में पुरुस्कारों की श्रेणी में ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिये एक नई श्रेणी जोड़ी गयी. 2021 के फिल्म फेयर अवार्ड की इस श्रेणी में सुनीता रजवार को बेस्ट स्पोर्टिंग एक्ट्रेस का अवा... Read more
हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय ‘डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल’
उत्तराखण्ड में साहित्य, ज्योतिष और दर्शन की परम्परा प्राचीन रही है. उत्तर वैदिक काल में इस अंचल में भारद्वाज आश्रम, कण्वाश्रम, बदरीकाश्रम और शुक्राश्रम जैसे सिद्धपीठों से वेद-वेदागों का पठन-... Read more
हिंदी कवि मंगलेश डबराल को गुज़रे एक साल हुआ. नौ दिसंबर 2020 को कोरोना महामारी से उनकी जान गई. प्रस्तुत संस्मरणनुमा वृत्तांत, कवि के कमरों के हवाले से है, जहां कवि बचपन से लेकर देह के आख़िरी... Read more
भारत के गर्म और उमस भरे मौसम के बीच नैनीताल की खोज ब्रिटेन के लोगों के लिए वरदान की तरह थी. औपनिवेशकवाद में अपनी मातृभूमि के ठंडे तापमान के लिए परेशान ब्रिटिशर्स को नैनीताल के मौसम में सुकून... Read more



























