कुमाऊंनी लोकगीतों में सामाजिक चित्रण भाग 1
लोकगीतों से हमारा तात्पर्य लोक साहित्य के उन रूपों से है, जो प्रायः अलिखित रहकर जन-साधारण द्वारा निर्मित होते हुए एवं परंपरा से देश काल की विविध परिस्थितियों का चित्रण करते हुए उनके बीच प्रच... Read more
रामलीला के बहाने नये – नये प्रयोग भाग : 1
कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः चलता है और जिसमें कई-कई बार बाजार का पूरा एक हिस्सा-पूरा इलाका ही मंच बन... Read more
रिखणीखाल में है ताड़केश्वर महादेव का मंदिर
जनपद पौड़ी गढ़वाल के रिखणीखाल विकासखण्ड से लगभग पच्चीस किलोमीटर बांज तथा बुरांश की जंगलों के बीच चखुलियाखांद से लगभग सात किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है ताड़केश्वर महादेव मंदिर. गढ़वाल राइफल क... Read more
केओ कार्पिन के संग मौत का खेल
केओ कार्पिन के संग मौत का खेल – प्रिय अभिषेक कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में किसी धूमकेतु की तरह आती हैं. आती हैं ,कुछ पल साथ रहती हैं और यकायक गायब हो जाती हैं. व्यक्ति के स्तर पर कोई खिलौना, व... Read more
देवी भगवती को समर्पित कोटगाड़ी देवी
देवी भगवती को समर्पित कोटगाड़ी देवी का मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में उसके मुख्यालय से 55 किलोमीटर तथा डीडीहाट से 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धार्मिक एवं मध्यकालीन व्यवसायिक कस्बेथल के निकट पांखू... Read more
औषधियां उगाकर हो सकता है पहाड़ों का आर्थिक विकास
औषधीय पादप कृषि और उत्तराखंड उत्तराखंड भारत का नवीनतम हिमालयी राज्य होने के साथ-साथ इस वर्ष 2018 में वयस्क यानी 18 वर्ष का होने जा रहा है. यह मेरी नज़र में राज्य का दुर्भाग्य ही है कि 18 वर्... Read more
गंगनाथ ज्यू की कथा
गंगनाथ ज्यू काली नदी के पार डोटीगढ़ के रहने वाले थे. कांकुर उन की राजधानी थी. उनके पास डोटीगढ़ की रौथानगिरी थी. माता का नाम प्योंला रानी तथा पिता का नाम भवेचंद था. दादाजी का नाम केसरचन तथा दाद... Read more
ठेठ कुमाऊंनी रामलीला का इतिहास – 2
[पिछली कड़ी का लिंक : ठेठ कुमाऊंनी रामलीला का इतिहास – 1] 1900 से पूर्व अल्मोड़ा की एक मात्र रामलीला बद्रेश्वर में होती थी. 1948 में बद्रेश्वर के रामलीला आयोजन स्थल पर उठे विवाद के कारण यहाँ आ... Read more
‘अपनी धुन में कबूतरी’ वृत्तचित्र का प्रदर्शन
(जगमोहन रौतेला की रपट) कुमाउनी लोकजीवन के ऋतुरैंण, न्योली, छपेली, धुस्का व चैती आदि विभिन्न विधाओं की लोकप्रिय लोकगायिका रही कबूतरी देवी के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र ‘अपनी धुन में कबूतरी’ का... Read more
गोलू देवता की कहानी
ग्वल्ल ज्यू की जन्म भूमि ग्वालियूर कोट चम्पावत थी. इस ग्वालियूर कोट में चंद वंशी राई खानदान का राज्य था जिनमें हालराई, झालराई, तिलराई, गोरराई और कालराई आदि प्रमुख राजा हुए. ग्वल्ल ज्यू के पि... Read more



























