तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से बाहरी दुनिया से अलग रहा. इस अलगाव का प्रभाव वहाँ की सामाजिक संरचनाओं पर स्पष्ट... Read more
नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश को हरूवा, सुरेश को सुरिया. ये नाम केवल लोकव्यवहार में प्रचलित थे, इनमें एक स्नेह एवं अपनत्व की भावन... Read more
उत्तराखंड के देहरादून ज़िले में यमुना और टोंस नदियों के संगम के समीप स्थित कालसी वह स्थान है जहाँ भारत के प्राचीन इतिहास की सबसे संवेदनशील आवाज़ पत्थर पर अंकित है. इस चट्टान पर उत्कीर्ण सम्र... Read more
अल्मोड़ा गजेटियर किताब के अनुसार, कुमाऊँ के एक नये राजा के शासनारंभ के समय सबसे पहला कार्य बालेश्वर में महादेव की उपासना को पुनः स्थापित करना था. लेकिन स्थितियाँ जल्द ही बदल गईं. राजा के गद्द... Read more
हर साल 14 नवंबर देश में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन नेहरू केवल बच्चों के चाचा ही नहीं थे वो प्रकृति, विशेषकर हिमालय और भ... Read more
जीवन की सबसे गहरी कहानियाँ अकसर वो होती हैं जो शब्दों में नहीं, रिश्तों की गंध में बसती हैं. ‘झंझावात’ ऐसी ही एक कथा है. एक स्त्री की, जो न केवल परिवार की धुरी थी, बल्कि उस लोक स... Read more
नीब करौरी धाम को क्यों कहते हैं ‘कैंची धाम’?
अगर आप कभी नैनीताल या अल्मोड़ा की तरफ़ यात्रा पर निकले हों तो रास्ते में “कैंची धाम” का नाम ज़रूर सुना होगा. दुनिया भर में ये “नीब करौरी धाम” नाम से प्रसिद्धी पा चुका धार्मिक स्थल है. अक्सर... Read more
उत्तराखंड की पहाड़ियाँ जितनी शांत और सुंदर हैं, उतनी ही रहस्यमय भी. यहाँ के गाँवों में आज भी कुछ परंपराएँ जीवित हैं जो देवता, विश्वास और डर — तीनों को एक साथ जोड़ती हैं. ऐसी ही एक परंपरा है... Read more
आपने अल्मोड़ा से आगे पिथौरागढ़ जाते हुए लखु उडियार का नाम तो सुना ही होगा, या शायद उस जगह से गुज़रे भी होंगे जहाँ सड़क के किनारे “संरक्षित स्मारक – लखु उडियार रॉक शेल्टर” लिखा है. इसे भारत स... Read more
पहाड़ से निकलकर बास्केटबॉल में देश का नाम रोशन करने कैप्टन हरि दत्त कापड़ी का निधन
हरि दत्त कापड़ी का जन्म पिथौरागढ़ के मुवानी कस्बे के पास चिड़ियाखान (भंडारी गांव) में हुआ था. 1958 से उन्होंने बॉक्सिंग, फुटबॉल और बास्केटबॉल खेलना शुरू किया, लेकिन बास्केटबॉल को ही अपनी जिं... Read more


























