जादुई बकरी की कहानी
बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक राजा और उसकी रानी रहते थे. उनकी एक ही बेटी थी — माया त्सारेना. लेकिन कुछ ही समय बाद रानी की मृत्यु हो गई. राजा ने दूसरी शादी की, पर नई रानी तो असल मे... Read more
आपने अल्मोड़ा से आगे पिथौरागढ़ जाते हुए लखु उडियार का नाम तो सुना ही होगा, या शायद उस जगह से गुज़रे भी होंगे जहाँ सड़क के किनारे “संरक्षित स्मारक – लखु उडियार रॉक शेल्टर” लिखा है. इसे भारत स... Read more
आप कितना जानते हैं नैनीताल के भाबर की नदियों को
ब्रिटिश काल में तैयार किए गए गजेटियर स्थानीय भूगोल, इतिहास और संसाधनों का अद्भुत खजाना हैं. ये दस्तावेज उस जमाने की प्रशासनिक व्यवस्था और भौगोलिक समझ का प्रतिबिंब हैं. आज हम बात करेंगे... Read more
नगरूघाट मेला : यहाँ लगती है “मितज्यू” की अनूठी डोर
उत्तराखंड की मिट्टी में लोक परंपराओं की खुशबू रची-बसी है. हर पर्व, हर मेला यहाँ सिर्फ उत्सव नहीं होता, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता का प्रतीक भी बन जाता है. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा का गवाह ह... Read more
सीएमएस की कुर्सी और सिस्टम का पोस्टमार्टम ?
इन दिनों बागेश्वर जिला अस्पताल भीतर ही भीतर सुलग रहा है. सिस्टम किसी के भी संभालते सँभल नहीं पा रहा है. अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए ज़रूरी सीएमएस की कुर्सी खाली पड़ी है. कहा ज... Read more
‘मनमोहन सिंह’ उम्मीदों से भरा सफर :
1991 से देश में आर्थिक क्रांति हुई जो निःसंदेह 1947 में नेहरू द्वारा की गई राजनीतिक क्रांति से कहीं अधिक असरदार थी. अस्सी के दशक में देश आतंरिक अस्थायित्व यानी बेरोजगारी और मुद्रा स्फीति के... Read more
‘भूतगांव’ पहाड़ की नब्ज पकड़ता उपन्यास
पत्रकार -उपन्यासकार नवीन जोशी के उपन्यास पढ़ना, पहाड़ की नब्ज पकड़ कर शिद्दत से उसके हाल-हालात जानना और महसूस करना है. फिर चाहे वह उनका चर्चित उपन्यास ‘दावानल’ हो, ‘टिकटशुद... Read more
अपनी माटी में बेटी की वापसी
6 सितंबर 2007, एक तारीख जो कैलेंडर में सिर्फ एक दिन थी, पर हमारे जीवन में वह एक अध्याय बन गई. 6 सितंबर 2007 का वो दिन था जब पांच जिज्ञासु यात्रियों का एक दल ऊं पर्वत, आदि कैलाश, सिनला दर्रा... Read more
ऐसे बीज बिछा रे, सुख चैन उगे दुख दर्द मिटे
पिछली कड़ी : डी एस बी के अतीत में ‘मैं’ डी एस बी मेरे लिए इसलिए भी खास बना रहा कि मेरा बचपन इसी की परिधि में बीता. वहीं घर था सरकारी, अंग्रेजों के समय का बना. टीन की छत, भीतर की तरफ लकड़ी लगी... Read more
‘हेमवंती’ जहां मोहब्बत मजबूरी नहीं ताकत बन जाती है
गढ़वाल और कुमाऊं अंचल ने संस्कृति के उन्नयन और उत्थान हेतु नित नए मील के पत्थर खड़े किए हैं, इसी कड़ी में 24 अप्रैल को रिलीज हुई गढ़वाली मूवी हेमवंती का जिक्र बहुत जरूरी प्रतीत होता है. जहां... Read more


























