मुल्क कुमाऊँ को ढुंगो ढुंगो होलो
लोकरत्न गुमानी पन्त के बाद जिस कुमाऊनी कवि का नाम आता है वह हैं कृष्ण पांडे. अल्मोड़ा जिले के पाटिया में जन्में कृष्ण पांडे के विषय में कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं हैं. कृष्ण पांडे की कविताओ... Read more
सबकी नजरें उत्तराखंड के आकाश मधवाल पर
पिछले दो दिनों से सोशियल मीडिया में एक नाम ट्रेंड कर रहा है – आकाश मधवाल. आईपीएल में मुम्बई इंडियंस टीम के एक खिलाड़ी के रूप में जाना जाने वाला यह नाम आज मुम्बई इंडियंस टीम का सबसे महत्वपूर्... Read more
भारत के अलावा और कहाँ मिलता है ‘काफल’
इन दिनों पहाड़ को जाने वाली सड़कों के किनारे काफल की टोकरी लिये पहाड़ी खूब दिख रहे हैं. लोक में माना जाता है कि काफल देवताओं द्वारा खाया जाने वाला फल है. देवताओं द्वारा खाए जाने वाले ख़ालिस... Read more
आज के समय नैनीताल किसी परिचय का मोहताज नहीं. पर एक समय ऐसा भी था जब लोग नैनीताल की स्थिति को लेकर असमंजस में थे. यह असमंजस अंग्रेजों को अधिक था. स्थानीय लोगों को नैनीताल के विषय में तो खूब ज... Read more
छिपलाकोट अन्तर्यात्रा : लम्बी सी डगर न खले
पिछली कड़ी – छिपलाकोट अन्तर्यात्रा : जिंदगी धूप तुम घना साया पिथौरागढ़ के सीमांत से हो रहे इस व्यापार और व्यापारियों में भोटान्तिक समाज के साहस, प्रयत्न और प्रयास की कथाओं से मुझे शुम्प... Read more
उत्तराखंड में वनाग्नि की समस्या पर एक जमीनी रपट
ऐतिहासिक दृष्टि से मानव सभ्यता के विकास में आग का महत्वपूर्ण योगदान है. पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार अफ्रीका में पैलियोलिथिक काल से मानव विगत 60000 वर्षों से विभिन्न प्रयोजनों हेतु आग का प्रयो... Read more
बकरी और भेड़िये
अल सुभह गांव के चौराहे वाले चबूतरे पर ननकू नाई उकड़ूं बैठकर अपने औजारों की सन्दूकची खोजने ही जा रहा था कि मिट्ठू आन पहुंचा.(Story by Bhagwati Prsaad Joshi) – राम-राम ननकू भाई – र... Read more
1 मई और रुद्रप्रयाग का बाघ
यह लेख वरिष्ठ पत्रकार व संस्कृतिकर्मी अरुण कुकसाल की किताब ‘चले साथ पहाड़’ का एक अंश है. किताब का ऑनलाइन पता यह रहा – ‘चले साथ पहाड़’ – सम्पादक(Gulabrai Mela Rudraprayag) गुलाबराय आने... Read more
छिपलाकोट अन्तर्यात्रा : जिंदगी धूप तुम घना साया
पिछली कड़ी – छिपलाकोट अन्तर्यात्रा : धूप सुनहरी-कहीं घनेरे साये “अब सुनो, ये जोहार के व्यापारी तिब्बत से व्यापार करने सतरह हजार पांच सौ फिट ऊँची घाटी पार करते थे जिसका नाम उंटाधुर... Read more
खोज्यालि-खोज्यालि, मेरी तीलु बाखरी
पशुपालक समाजों में पशु के गुण-विशेष से आत्मीयता बरती जाती रही है. नेगी जी ने गढ़वाल की प्राथमिक अर्थव्यवस्था आधारित पशुपालन पर एकाधिक गीत गाए, जिनमें ‘ढ्येबरा हर्चि गेना’ से लेकर... Read more


























