बुला रही है दारमा घाटी
दारमा घाटी को पिछले साल यानी 2017 में 18 साल बाद फिर से अनुभव करना एक खूबसूरत ख्वाब को जीने जैसा था. मैं यकीनन इसे उत्तराखंड ही नहीं समूचे हिमालय की सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक मानता हूं.... Read more
तीलू रौतेली की दास्तान: जन्मदिन विशेष
मध्यकाल में गढ़वाल के पूर्वी सीमान्त के गांवों पर कुमाऊं की पश्चिमी उपत्यकाओं पर बसे कैंतुरा (कत्यूरा) लोग निरंतर छापा मार कर लूटपाट करते रहते थे. अनुमान किया जाता है कि उस काल में गढ़राज्य... Read more
कंकालों के अनसुलझे रहस्यों वाले रूपकुंड की यात्रा
विनीता यशस्वी विनीता यशस्वी नैनीताल में रहती हैं. यात्रा और फोटोग्राफी की शौकीन विनीता यशस्वी पिछले एक दशक से नैनीताल समाचार से जुड़ी हैं. रुपकुंड उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित झील है... Read more
कुक्कुट-हरण
ललित मोहन रयाल उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. 2018 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘खड़कमाफी की स्मृत... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 6
अमित श्रीवास्तव उत्तराखण्ड के पुलिस महकमे में काम करने वाले वाले अमित श्रीवास्तव फिलहाल हल्द्वानी में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. 6 जुलाई 1978 को जौनपुर में जन्मे अमित के गद्य की शैली... Read more
बचपन और मुगली घुट्टी 555
माता-पिता और परिवारजन बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, यह आज की प्रमुख सामाजिक समस्या है. माना जाता है कि इस वजह से बच्चे कई असामाजिक गतिविधियों की तरफ चले जा रहे हैं. यह पढ़ते, सुन... Read more
मार्डन गर्ल
एक बार हम दो दोस्तों ने मास्टरजी से बड़ी हिम्मत जुटा कर एक दरखास्त की कि हमें गाय पर नहीं बकरी पर निबंध लिखने दिया जाय. हम दोनों के घर में मिलाकर कुछ सात बकरियाँ थी इसलिए हम बकरी पर बेहतर लिख... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 5
अमित श्रीवास्तव उत्तराखण्ड के पुलिस महकमे में काम करने वाले वाले अमित श्रीवास्तव फिलहाल हल्द्वानी में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. 6 जुलाई 1978 को जौनपुर में जन्मे अमित के गद्य की शैली... Read more
माइकल चाचा का मर्म
ललित मोहन रयाल उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. 2018 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘खड़कमाफी की स्मृत... Read more
पहाड़ियों के लिए दिशाएँ सिर्फ दो होती हैं
होती होंगी दिशाएँ चार, आठ या दस. हम पहाड़ियों के लिए दिशाएँ होती हैं सिर्फ दो – ऊपर और नीचे. यूँ तो मुख्य दिशाएँ चार मानी जाती हैं पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण. इनके अतिरिक्त इन दिशाओं स... Read more


























