इल्म-ओ-अदब का शहर लखनऊ
कहो देबी, कथा कहो – 32 पिछले कड़ी कहो देबी, कथा कहो –31 काम भी खाना-खज़ाना भी, यह सब तो ठीक मगर इल्म-ओ-अदब के गलियारों में भी तो पहुंचना था, जहां बातें हों, मुलाकातें हों और मेरी कलम चलती रहे.... Read more
बड़ी महिमा है नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारे की
तेज हवा के झोंकों और हल्की-हल्की बारिश के बीच नानकसागर (Nanakmatta Sahib) के किनारे खड़े होकर उसमें उठती लहरों को देखना भी एक अलग अनुभव है. बेहद विशाल सागर है ये. जहां तक नजर जाती है बस नीला... Read more
अंतरिम बजट का कौतिक
कल केंद्र में एनडीए सरकार अंतरिम बजट (Interim Budget) जारी करने वाली है. एक आम आदमी की भाषा में प्रोफेसर मृगेश पांडे बता रहे हैं कि यह अंतरिम बजट किस प्रकार भारत को प्रभावित करेगा: सम्पादक प... Read more
उत्तराखंड के लद्दाख की तस्वीरें
उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में भारत तिब्बत सीमा पर एक गांव है जादुंग. जादुंग, नेलांग घाटी में स्थित एक गांव है. नेलांग घाटी एक इनरलाइन एरिया है जो कि भारत चीन के बॉर्डर पर पड़ता है, पर्यटकों के... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 102
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
आजादी के बिगुल: सोर घाटी पिथौरागढ़ -प्रोफेसर मृगेश पाण्डे ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ मारो और मरो की हसरतें पाले अवध लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने 1857 में कूर्मांचल के जुझारू कालू सिंह महरा क... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 101
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
लखनऊ का लज़ीज़ खाना-खजाना
कहो देबी, कथा कहो – 31 पिछले कड़ी कहो देबी, कथा कहो –30 जानता था, इस शहर में रहना है तो इसकी धड़कनों को सुनना होगा, तभी यह मुझे गले लगाएगा. दो-चार दिन दीप होटल में बिताने के बाद हजरतगंज के चौध... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 100
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 18 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड होने की प्रतीक्षा करें.) बचपन के कुछ वाकये और कुछ लोग इस तरह याद हैं कि लगता है जैसे सब... Read more

























