हिसालू की जात बड़ी रिसालू
मई जून की गर्मियों में उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ों में कंटीली झाड़ियों के बीच उगने वाला एक रसदार फल होता है जिसे हिसालू (Hisalu) कहते हैं. उत्तराखंड के आदि कवि गुमानी हिसालू की प्रसंशा... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 118
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 21 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड होने की प्रतीक्षा करें.) जौं की ताल का मैं आप लोगों को आखिरी किस्सा बताने जा रहा हूं. आख... Read more
भट की चुड़कानी: पहाड़ियों का पसंदीदा व्यंजन
चुड़काड़ी, चुटकाड़ी, चुलकाड़ी चुड़कानी, चुटकानी (Bhat Ki Chulkani) नाम से जाने-पहचाने जाने वाले व्यंजन को उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल में भात के साथ खाए जाने की परंपरा है. इसे उत्तराखण्ड में सर्वाध... Read more
अपने हिमालय की चोटियों को पहचानिए – त्रिशूल
( पोस्ट को नीरज पांगती की आवाज़ में सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें ) हिमालय की तीन सुन्दर चोटियों के समूह को त्रिशूल के नाम से जाना जाता है. भगवान शिव के अस्त्र त्रिशूल जैसा दिखाई देने के... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 117
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
वो शिखर पर जो गाँव है, वही काफलीधार है. किसने रखा होगा यह नाम? सोचती है लछिमा – कैसा है यह नाम? ‘काफल वाली धार!’ लेकिन सिर्फ काफल तो होता नहीं वहां. काफल के अलावा बुरुंश ह... Read more
अंगूर, बांग्ला फिल्म भ्रांतिविलास की रीमेक थी, जो ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाटक पर आधारित थी. यह नाटक विलियम शेक्सपियर के ‘द कॉमेडी ऑफ एरर्स’ पर आधारित था. फिल्म की थीम व कई दृश्य हू-ब-हू क... Read more
नंदा देवी राज जात के अनूठे फोटो
उत्तराखंड में प्रत्येक बारह वर्ष में होने वाली ऐतिहासिक नंदा देवी राज जात भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी यानी नन्दाष्टमी को की जाने वाली एक देवयात्रा है जिसे कुमाऊँ में अल्मोड़ा और गढ़व... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 116
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more



























