फिरंगी जुल्म सहने की प्रैक्टिस के लिए जब अल्मोड़े के युवक अपने घावों में नमक भरवाते थे
अल्मोड़े में कांग्रेस का जन्म 1921 में हुआ. इससे पहले जब 1905 में बंग भंग आन्दोलन का प्रारम्भ हुआ, उससे कुछ बच्चों और नवयुवकों के सुकुमार मन में अंग्रेजी राज के प्रति घृणा के भाव उत्पन्न हो... Read more
जब वो उड़ान भरती है तो डोर कस दी जाती है
एक बार फिर शादी का सीजन आ गया है और उसकी परेशानियाँ एकबार फिर बढ़ गयी हैं. पिछले 5 सालों में उसने अपने व्यावसायिक जीवन में वो कर दिखाया था जो करने में लोगों को 10 बरस लग जाते हैं. लेकिन कुछ म... Read more
बेटियों को जबरन बेटा बनाते हम लोग
महिला अधिकारों के नाम पर रस्म अदायगी का एक दिन और आ कर चला जाएगा 8 मार्च (International Women’s Day) को. साल में 364 दिन पुरुषों के एकाधिकार के और एक दिन महिलाओं के लिये. इस पर भी कथित... Read more
वो स्त्रियोचित हो जाना नहीं था
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) पर हमारे नियमित सहयोगी अमित श्रीवास्तव की यह मर्मभेदी रचना पढ़िए. बराबरी -अमित श्रीवास्तव किसी दिन किसी समय कहीं एंटी एनक्रोचमें... Read more
महिला सुरक्षा, अपराध और महिला उत्थान में है परिवर्तित नजरिए की दरकार: भारतीय समाज की बनावट अनादि काल से सामंतवादी रही है. ऋग्वेद के काल में जब ऋचाओं में अपनी आवश्यकताओं के लिए मनुष्य ने देवत... Read more
नैनीताल लोकसभा सीट पर भाजपा नेताओं ने चुनाव के लिहाज से अपनी राजनैतिक सक्रियता बढ़ा दी है. पहले नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी को टिकट की दौड़ से उम्र की अधिकता के कारण बाहर माना जा रहा... Read more
मोत्दा-च्चा-बड़बाज्यू की दास्तान
यह विचित्र किस्म का नाम एक ही व्यक्ति का है, जिसमें एक साथ तीन रिश्तों के संबोधन पिरोए गए हैं. दो संबंध तो स्पष्ट हैं, बड़ा भाई और चाचा, मगर तीसरा शब्द ‘बड़बाज्यू’ कुमाऊनी का है, जिसका अर्थ है... Read more
हनुमान चौराहे का प्रेमालाप
ग्वालियर शहर की एक पुरानी सड़क, जिसका नाम नई सड़क था, के एक प्रसिद्ध चौराहे पर वो उसका इंतज़ार कर रहा था. इसे संयोग कहें या विडम्बना; उस चौराहे का नाम हनुमान चौराहा था. शायद ये कलयुग के घोर से... Read more
छछिया का हिंदी अर्थ होता है एक बर्तन जिसमें मट्ठा रखा जाता है. लेकिन उत्तराखण्ड में यह एक अर्धतरल व्यंजन हुआ करता है. छछिया, छसिया या छ्छेड़ो उत्तराखण्ड के पारंपरिक खान-पान (Traditional Foods... Read more
अनजाने संपेरे, नट और जादूगर
कहो देबी, कथा कहो – 36 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 35 “कहो देबी, कहां चले गए थे? हम तो कान लगाए हुए थे, कथा सुनने के लिए.” “क्या बताऊं, जाना पड़ा कहीं और कथा सुनाने के लिए. दिल्ली से मुंबई... Read more



























