सीएमएस की कुर्सी और सिस्टम का पोस्टमार्टम ?
इन दिनों बागेश्वर जिला अस्पताल भीतर ही भीतर सुलग रहा है. सिस्टम किसी के भी संभालते सँभल नहीं पा रहा है. अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए ज़रूरी सीएमएस की कुर्सी खाली पड़ी है. कहा ज... Read more
अपनी माटी में बेटी की वापसी
6 सितंबर 2007, एक तारीख जो कैलेंडर में सिर्फ एक दिन थी, पर हमारे जीवन में वह एक अध्याय बन गई. 6 सितंबर 2007 का वो दिन था जब पांच जिज्ञासु यात्रियों का एक दल ऊं पर्वत, आदि कैलाश, सिनला दर्रा... Read more
शराब से मोहब्बत, शराबी से घृणा?
इन दिनों उत्तराखंड के मिनी स्विट्जरलैंड कौसानी की शांत वादियां शराब की सरकारी दुकान खोलने न खोलने पर गरमाई हुई है. हैरत इस बात पर भी है कि कई ऐसे महानुभाव भी यहां शराब की दुकान खोलने को उचित... Read more
जब मात्र तवाघाट तक ही मोटर मार्ग था
पिछली कड़ी : समूचे दारमा गांव में महिलाओं को धर्मिक अनुष्ठानों में बराबर का अधिकार मिला हुआ है किलोमीटर भर समतल बुग्याल के बाद उतार आया तो बेदांग से आ रही बलखाती बिदांग गाड़ के दीदार हुए. नदी... Read more
समूचे दारमा गांव में महिलाओं को धर्मिक अनुष्ठानों में बराबर का अधिकार मिला हुआ है
पिछली कड़ी : फिर से मैं अपना बचपन गांव-घाटियों में गुजारना चाहता हूं हैरान-परेशान वह फिर बाहर किसी से फुसफुसाने लगा. एक बार फिर से उसने टेंट के अंदर लाइट मारकर झांका तो मजबूरन मैं उठा. उसकी ल... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पिछली कड़ी – दारमा घाटी में घरों के बीच का रास्ता स्वप्नलोक जैसा लगा सरिता ने बताया कि, “बारह वर्ष की इस बार की... Read more
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पिछली कड़ी : दांतू गांव तक का सफ़र खाना बनते-बनते अंजू से बातचीत होने लगी तो उसने बताया – सीपू में बारह साल... Read more
दांतू गांव तक का सफ़र
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree पिछली कड़ी : रहस्यमयी कथाओं के लोक दारमा की ओर 2007 में व्यास घाटी से सिलना पास होते हुए दारमा घाटी की परिक्रमा पूरी कर... Read more
रहस्यमयी कथाओं के लोक दारमा की ओर
“दद्दा हमारे गांव में महादेव शिव की पूजा है. यह पूजा हर बारह साल में होती है. इस बार आप जरूर आना हां हमारे गांव.” यह कहते हुए सरिता सिपाल ने मुझे शिव महोत्सव का निमंत्रण पत्र दिय... Read more
लेखन यात्रा के बहाने
लिखने-पढ़ने की अपनी छोटी सी यात्रा में जाने कितने सहयात्री मिले, जो मेरे लेखन शुरू करने की वजह बने. उनसे मुझे देखने और लिखने का शऊर मिला और अपने विचारों पर टिके रहने का हौसला. जब कभी पीछे मु... Read more


























