मल्टीनेशनल नौकरी छोड़ कर पहाड़ लौटे इस युवक ने मिसाल कायम की युवाओं के लिए
[जल्द ही उत्तराखण्ड स्थापना दिवस आने वाला है. इस अवसर पर हम देश-दुनिया में रह रहे उत्तराखण्ड के उद्यमी युवाओं पर एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहे हैं जिन्होंने अपने हौसलों और परिश्रम से बड़ी उपल... Read more
हल्द्वानी के कुछ पुराने परिवार
[पिछली क़िस्त: लॉर्ड हार्डिंग ने बनवाया था काठगोदाम का वह बेजोड़ गौला पुल] हरिदत्त जोशी अपने परिवार की परंपरा को बनाये रखते हुए समाजसेवा में भी अग्रणी रहे. वह आर्य समाजी थे. राम मंदिर की धर्मश... Read more
उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश से थोड़ा बहुत भी ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति हुड़किया बौल शब्द जानता होगा. हुड़किया बौल कुमाऊं के सबसे लोकप्रिय कृषि गीत हैं. इसी का एक भाग है गुड़ौल गीत. (Uttarakh... Read more
1 दिसंबर 1924 को राजस्थान में पैदा हुए मेजर शैतान सिंह भाटी ने स्नातक की डिग्री लेने के बाद जोधपुर राज्य की सेना में नौकरी शुरू की थी लेकिन जोधपुर रियासत के भारत में विलय के बाद उनका तबादला... Read more
आचार्य नरेन्द्र देव जिन्हें अपना संस्कार-पिता मानते थे नैनीताल के प्रताप भैया
आचार्य नरेन्द्र देव की 130 वीं जयन्ती पर विशेष : आचार्य नरेन्द्र देव का बहुमुखी व्यक्तित्व ही ऐसा था कि उन्हें किसी दायरे में रखकर समेटना संभव नहीं. वे एक समाजवादी चिन्तक होने के साथ-साथ, प्... Read more
[पिछली क़िस्त: 24 अप्रैल 1884 को सबसे पहले रेल पहुंची थी काठगोदाम में] काठगोदाम में गौला नदी पर सन 1913-14 में लार्ड हार्डिंग ने 350 फीट लंबा बहुत आकर्षक धनुषाकार पुल बनवाया. जिसमें नीचे से... Read more
उत्तराखण्डी गीतों में ‘अस्यारी को रेटा’ का मतलब
उत्तराखण्ड का लोकमानस जिस प्रकार अपनी सभ्यता व संस्कृति की एक अलग पहचान रखता है, उसी तरह यहां के लोकसाहित्य का भी अपना अनूठा स्वरूप है. मेरे पिछले लेख में उल्लेख था कि किस प्रकार एक ही शब्द... Read more
[पिछली क़िस्त: 1888 में अंग्रेजी मिडिल स्कूल की तरह शुरू हुआ था हल्द्वानी का एम. बी. कॉलेज] लकड़ी का कारोबार यहाँ बहुतायत में होता था तथा काठगोदाम में काठबांस की चौकी थी. पहाड़ों से गौला में ‘... Read more
पहाड़ में जीवन जीने का पर्याय है हाड़-तोड़ मेहनत. हाड़-तोड़ मेहनत पहाड़ के लोगों का आभूषण है जिसे यहां के लोक और परम्पराओं में बड़े सहज रूप से देखा जा सकता है. पहाड़ के रहवासियों के जीवन में यह हा... Read more
1939 में बनी थी कुमाऊं की लाइफलाइन केमू
कुमाऊँ में मोटर यातायात की शुरूआत सर्वप्रथम 1915 में नैनीताल-काठगोदाम के बीच हुई. इसके पश्चात 1920 में काठगोदाम- अल्मोड़ा के मध्य मोटर यातायात शुरू हुआ. (KMOU Established in 1939) सन् 1920 म... Read more


















