कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पहाड़ को छोड़कर भी पहाड़ को नहीं भूलते हैं, उन्हीं में से एक है बीके सामंत.
2000 में पहाड़ छोड़कर कामकाज के सिलसिले में मुम्बई चल पड़े बीके सामंत मूल रूप से चंपावत जिले के निवासी हैं और इस टाइम देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई शहर में कारोबार करते हैं. वे मुम्बई में श्री कुंवर इंटरटेनमेंट नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं. श्री कुंवर इंटरटेनमेंट बॉलीवुड के लिए गीत लिखने और म्यूजिक कंपोजिंग का काम करता है.
पहाड़ की बंद पड़े घरों की पीड़ा के वशीभूत बीके सामंत दोबारा पहाड़ों की तरफ आकर्षित हुए. अपनी भावनाओं को उन्होंने कई अद्भुत गीतों में पिरोया है.
उन्होंने हाल ही में ‘तूऐ जा औ पहाड़’ गीत की शूटिंग बेतालघाट ब्लॉक के सिमलखा गांव में की. इस गीत में पहाड़ से पलायन की पीड़ा और उजाड़ हो चले घरों के दर्द को बखूबी फिल्माया गया है. पलायन के बाद वीरान हो चले घरों में ही इस गीत की शूटिंग भी की गयी है.
इस गीत में उत्तराखंड के मशहूर रेडियो जॉकी आरजे काव्य भी नजर आएंगे.
बीके सामंत किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. इनके एक गीत ने वह धमाल मचाया जो आज तक कोई कुमाऊनी गीत नहीं मचा सका है. वह गीत था ‘थल की बाजारा’ दो करोड़ बार देखे जा चुके इस गीत से बीके सामंत काफी चर्चित हुए.
इनके कई गीत यूट्यूब पर आए हैं और धमाल मचा रहे हैं. बीके सामंत बताते हैं कि अब वे उत्तराखंड की संस्कृति एवं संगीत को नए मुकाम पर पहुंचकर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिश में लगे हैं.
‘तूऐ जा औ पहाड़’ गीत को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा देहरादून में रिलीज किया गया.
हल्द्वानी के बैंककर्मी विनोद प्रसाद लगभग एक दशक तक दैनिक हिन्दुस्तान में फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं.
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