समाज

आज बिरुड़ पंचमी है

ईश्वर का भी मानवीकरण लोक परम्पराओं की सबसे ख़ास बात होती है. लोक परम्पराओं में ईश्वर होता तो परमशक्तिशाली है पर लोगों से उसका पारिवारिक रिश्ता रहता है. उत्तराखंड की लोक परम्पराओं में इसे सहज देखा जा सकता है. मसलन आज से कुमाऊं क्षेत्र में शुरू हुये सातों-आठों लोकपर्व को लीजिये.
(Birud Panchami Uttarakhand)

सातों-आठों लोकपर्व में मां पार्वती को दीदी और भगवान शिव को भिना यानी जीजाजी के रुप में पूजा जाता है. इस लोकपर्व में लड़की के घर आने पर उत्साह और प्रेम के साथ लड़की के घर से जाने पर पूरे गांव भर में छा जाने वाली उदेख को देखा जा सकता है. अपने आराध्य को अपने पारिवार का सदस्य मान उससे लाड़ किया जाना, उसके साथ छेड़-छाड़ भरे गीतों को गाना केवल लोक जीवन में ही संभव है.         

कुमाऊं अंचल में आज का दिन बेहद ख़ास और पवित्र माना जाता है. आज भाद्रपद माह की पंचमी है स्थानीय भाषा में आज का दिन बिरूड़ पंचमी कहलाता है. आज से पहाड़ों में सातों-आठों की बहार आती है.
(Birud Panchami Uttarakhand)

आज के दिन कुमाऊं में लोग अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई कर वहां बिरूड़े रखते हैं. बिरूड़े यानी पांच या सात तरह के अंकुरित अनाज. मक्का, गेहूं, गहत , ग्रूस (गुरुस), चना, मटर और कलों के अंकुरित दानों को सामूहिक रूप से बिरूड़े कहा जाता है. बिरूड़े  से ही अपने आराध्य गौरा-महेश को पूजा जाता है और प्रसाद के रूप में भी इसे ही बांटा जाता है.

गीत और नृत्य के साथ लोग अपने आराध्य गौरा-महेश को परिवार का हिस्सा बनाकर घर पर लाते हैं. पहले घर में आती गौरा है फिर आते हैं महेश. धान के पौधों से बने गौरा-महेश का श्रृंगार किया जाता है उन्हें पकवान अर्पित किये जाते हैं. पूरा पहाड़ अगले कुछ संगीत और नृत्य से सराबोर रहेगा.

आज से बेटियां अपने मायके आयेंगी. खूब प्रेम से अपनी गौरा दीदी और महेश्वर भिना का स्वागत करेंगी और फिर विदा करेंगी अपने दीदी गौरा को भिना महेश्वर के साथ. बिरूड़ पंचमी के दिन से कुमाऊं के गावों में एक अलग रंगत आ जाती है.         
(Birud Panchami Uttarakhand)

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री फाउंडेशन

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • आज भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी है
    हो सके तो लेख में सुधार कर ले

Recent Posts

दिवाली के मौके पर गाँव में बिताए पुराने पलों की याद

छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं... इस बात पर…

1 day ago

पंतनगर विश्वविद्यालय: हरित क्रांति की वह कहानी, जिस ने भारत के गाँवों की तस्वीर बदल दी

एक ऐतिहासिक यात्रा : कृषि, विज्ञान और किसानों के सपनों की कहानी (Pantnagar University Green…

3 days ago

मशीन को मनुष्य बनाते मनुष्य (`वी वर हियर’ ऐज़ ‘ह्यूमंस इन द लूप’!)

मनुष्य होने का मतलब क्या है? एआई से पूछें? लगता तो ऐसा ही है कि…

3 days ago

उत्तराखंड के पहाड़ों का कटु सत्य है पायर “चिता”

विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित चर्चित फ़िल्म पायर "चिता" पूरे देश में रिलीज गई है. 26…

6 days ago

डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया: उत्तराखंड के इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था को समझने की एक दृष्टि

पिछली कड़ी : धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’ डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया की पुस्तक, "द कुमाऊं…

6 days ago

पहाड़ का वह बूढ़ा पिता

पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…

3 weeks ago