200 साल पुराने  यात्रा-वृतांत में  कुमाऊँ के ‘खस’

9 months ago

उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में लिखे गए यात्रा-वृतांत भारत के सामाजिक, प्रशासनिक और भौगोलिक इतिहास को समझने के महत्त्वपूर्ण…

तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन

9 months ago

पिछली कड़ी  : जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे उत्तराखंड की…

बंदर बहादुर के चोर तेंदुए को जंगल से भगाने वाली लोककथा

9 months ago

बहुत पहले की बात है. हिमालय की तलहटी में बसे एक घने जंगल और उसके पास बसे गाँवों में एक…

200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड

9 months ago

‘ट्रैवल्स इन द हिमालयन प्रोविन्सेज़ ऑफ़ हिंदुस्तान एंड द पंजाब’ उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक हिमालयी समाज, भूगोल और राजनीति को…

जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे

9 months ago

पिछली कड़ी  : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट नहीं रहा, यह तो पिछले दो…

एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा

9 months ago

पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले एक लंबे पैदल मार्ग पर…

तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन

9 months ago

तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से बाहरी दुनिया से…

इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक

9 months ago

हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में जब कोई आगंतुक किसी पुराने घर या मंदिर के…

नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !

9 months ago

नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश को हरूवा, सुरेश को सुरिया. ये नाम…

खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?

9 months ago

उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल किया है. यह निर्णय लिया…