अरुण यह मधुमय देश हमारा
Posted By: Kafal Treeon:
शाम को टहलते हुए सोच रहा था कवि ने ऐसा क्यों कहा – अरुण यह मधुमय देश हमारा? वह कह सकता था – देखो यह मधुमय देश हमारा, अथवा – अहो यह मधुमय देश हमारा. कविगण भूत, भविष्य,... Read more
ॐ अग्नये स्वाहा, इदं अग्नये इदं न मम
Posted By: Girish Lohanion:
उनके जैसा ज्वलनशील व्यक्ति मिलना मुश्किल था. लोग कहते हैं कि उनके माथे पर लिख दिया जाना चाहिये था- अत्यंत ज्वलनशील, दूरी बनाए रखें. थोड़े-बहुत ज्वलनशील तो हम सभी होते हैं, वे अत्यंत ज्वलनशील... Read more
मॉरिशस में युवाओं को हिंदी में आनंदित होते देखा
Posted By: Kafal Treeon:
सविता तिवारी स्वतंत्र पत्रकार, मॉरीशस विश्व हिन्दी सम्मेलन में जाने का यह मेरा पहला मौका था. लोगों की बातें, उम्मीदों और अपेक्षाओं को थोड़ी देर के लिए अलग कर दिया जाए तो मुझे निजी रूप से इस... Read more
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