ज़रा सोचें सच की तस्वीरों को आईने में हम उतारने चलें और तस्वीरें ही बोलने लगें, तो कैसा महसूस होगा हमें? चौंकेंगे? धक्का लगेगा? बिल्कुल लगेगा क्योंकि हमें बोलती तस्वीरों की और आंखों में झाँक... Read more
अनुराग कश्यप चलती का नाम गाड़ी हो चुके हैं. सितारेदार प्री-पेड रिव्यूज का पहाड़ लग चुका है. वे अब आराम से किसी भी दिशा में हाथ उठाकर कह सकते हैं- इतने सारे लोग बेवकूफ हैं क्या? फिर भी इतना क... Read more
अमूमन कहानियां तीन तरह से कही जाती हैं. पहला तरीका, सत्य घटनाओं का अपनी दृष्टि के मद्देनजर सीधा सच्चा बयान. दूसरा, आद्यांत कपोल कल्पना. तीसरा, सत्य घटनाओं से कुछ हिस्से उठाकर उसे समाजपयोग के... Read more
भारतीय सिनेमा को बदलता एक मराठी निर्देशक
‘सैराट’ (मुक्त) क्षेत्रीय भाषा में रचा गया भारतीय सिनेमा का महाख्यान है. ‘सैराट’ बोन्साई होती जा रही मानवीय संवेदना की जड़ों को गमलों से उखाड़ कर गीली ज़मीन में रोपने... Read more
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