सन् 1597 ई0 में कुमाऊं के राजा रुपचन्द की मौत हो जाने के बाद उसका बेटा लक्ष्मीचन्द को कुमाऊं की गद्दी पर बैठा. मनोदयकाव्य के आधार पर इस समय गढ़वाल की गद्दी पर मानशाह विराजमान था. लक्ष्मीचन्द... Read more
डोटी की राजकुमारी रुद्रचंद की मां ने तोहफे में अपने भाई से सीरा मांगा, लेकिन भाई ने उसे देने से इनकार कर दिया. रुद्रचंद के पिता की मृत्यु हो जाने पर भी उसकी मां सती नहीं हुई. उसने कहा ‘जब मे... Read more
चंद राजाओं के शासनकाल में 36 तरह के राजकर वसूले जाते थे, जिन्हें छत्तीसी कहा जाता था. थातवान परगनाधिकारी— सीरदार या सिकदार के मार्फत कर को राजकोष में जमा करते थे. उपज का छठा भाग ही कर में लि... Read more
फल्दाकोट मध्यकाल में कुमाऊँ का एक सशक्त पहाड़ी राज्य था. फल्दाकोट राज्य के अंतर्गत पाली पछाऊं का कोसी, स्याहीदेवी, ताड़ीखेत व सल्ट का ज्यादातर हिस्सा आता था. फल्दाकोट पर कत्यूरियों की ही एक शा... Read more
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