एक अल्मोड़िया शगल ऐसा भी
अमूमन हर आदमी को कोई न कोई शौक-शगल-खब्त-आदत-लत होती है. फेहरिश्त काफी लंबी हो सकती है. इसमें कचहरी जाना भी शामिल है. बड़ी ही जानदार लत है. तंबाकू जैसी असरदार. कब गिरफ्त में ले लेती है, पता न... Read more
आल्मोड़े में कुमाऊं मंडल विकास निगम के हाॅलिडे होम के ऊपर बसे काॅटेज वाले इलाके में दोपहर को एक गहरा सन्नाटा पसरा होता. घरों के सारे काम निपटाने के बाद सुस्ताती औरतों के साथ साथ आसपास के देवद... Read more
चार्ली चैप्लिन के दो अनूठे किस्से
आज यानी 16 अप्रैल को चार्ली चैप्लिन (Charlie Chaplin) का 130वां जन्मदिन है. एक अभिनेता और फिल्म निर्माता-निर्देशक की हैसियत से उन्होंने जो कीर्तिमान स्थापित किये उन्हें तोड़ सकना संभवतः किसी... Read more
Popular Posts
- पहाड़ का वह बूढ़ा पिता
- कुमाऊं में रामलीला की परम्परा
- ‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…
- हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें
- ‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है
- धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’
- गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी
- देवदार या देव दारु
- कसारदेवी : जहां स्वर्ग के सबसे करीब होने का अहसास होता है
- दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व
- पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता
- अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें
- अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक
- सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन
- उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज
- कामिनी तुम कौन?
- पूर्वी नयार नदी की वो बाढ़
- कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा
- बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार
- आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”
- भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्
- उत्तराखण्ड के सरोवर
- दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध
- सिंधुजा की कविता : स्मृति यात्रा
- पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल
