संजू बाबू नैनीताल के एक बड़े अंगरेजी स्कूल से पढ़े थे. यह इकलौता तथ्य उन्हें अधिकार देता था कि वे अपने व्यवहार में एक सतत ठसका बनाए रखें. कपड़ों से लेकर घड़ी और म्यूजिक सिस्टम से लेकर जूतों तक ह... Read more
1977 में मैं करीब दस साल का था. दो साल पहले जब इमरजेंसी लगी थी, हम लोग अल्मोड़ा में रहते थे. इमरजेंसी की सबसे ठोस स्मृति के तौर पर मुझे याद आता है कि हमारे पड़ोस में रहने वाले एक वकील साहब, जि... Read more
गुलों में रंग भरे: जन्मदिन पर मेहदी हसन की याद
उस्तादों से लगी लगन तब न कविता की तमीज़ थी न संगीत समझने की. बीस-बाईस की उम्र थी और मीर तकी मीर का दीवान सिरहाने रख कर सोने का जुनून लग चुका था. उनके शेर याद हो जाया करते और सोते-जागते भीतर ग... Read more
मृत्यु को मजाक बना देने में उस्ताद हैं हम
नदी किनारे एक बड़े पत्थर पर थका बैठा मैं इंतज़ार कर रहा था कि चिता किसी तरह आग पकड़ ले, जल जाए और झटपट किसी सही से अड्डे पर जाकर कुछ खा लूं. भूख से पेट ऐंठ रहा था. मैं बिना नाश्ता किये यह सुनत... Read more
चेकोस्लोवाकिया के भूत-भिसौणों के किस्से
भूत-प्रेत और उनके अस्तित्व और उनके बारे में प्रचलित बेहद रचनात्मक किस्से-कहानियां बचपन से ही मुझे बहुत आकर्षित करते रहे हैं. कथावाचन की परम्परा में इन महानुभावों का बड़ा ज़रूरी और महत्वपूर्ण स... Read more
सुतली उस्ताद और फेसबुक
जल के असंख्य नाम होते हैं. मेरे एक परम सखा के भी ऐसे ही असंख्य नाम हैं. कोई तीसेक साल पहले एक दफा होली के मौसम में उन्होंने बाबा तम्बाकू के टीन के डिब्बे में छेद कर और उस छेद में से घासलेट म... Read more
सुल्ताना डाकू की अजब दास्तान
सुल्ताना डाकू के नाम से कुख्यात सुलतान सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के बिजनौर-मुरादाबाद इलाके में रहने वाले घुमन्तू और बंजारे भांतू समुदाय से था. भांतू अपने आपको मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप... Read more
मुनस्यारी का बुरांश
चल रूपा बुरांसा क फूल बणी जौंला छमछम हिट छींछांड़ियूं को पाणी पेई औंला गढ़वाली कवि-गीतकार महेशानंद गौड़ ‘चंदा’ का यह लोकप्रिय गीत बतलाता है कि जनमानस में रचा-बसा बुरांश का फूल उत्तर... Read more
भैया जी का हाथी पारक
भैया जी एक स्कूलसखा के सखा थे और जीवन में पहली बार पहाड़ घूमने के उद्देश्य से लखनऊ से नैनीताल आए थे. भैयाजी को नैनीताल भ्रमण कराने का ज़िम्मा मुझे सौंपते हुए स्कूलसखा ने कुछ दिन पहले चिठ्ठी भे... Read more
लाला अमरनाथ को आंकड़ों में नहीं बांधा जा सकता
भारत में क्रिकेट अपनी जड़ें जमा रहा था जब 1933 में बॉम्बे जिमखाना में बाइस साल के लाला अमरनाथ ने अपना पहला ही टेस्ट मैच खेलते हुए डगलस जार्डीन की अंग्रेज़ टीम के खिलाफ़ मात्र 180 गेंदों पर 118... Read more
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