अल्मोड़ा के दो पेड़ों का खूबसूरत मोहब्बतनामा
यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो आपने पहले शायद ही कहीं पढ़ी या सुनी हो. यह कहानी पिछले तकरीबन 100 सालों से अल्मोड़ा की माल रोड में चल रही है और हमें उम्मीद है की आने वाले कई सालों तक ऐसे ही जारी... Read more
देवगाथाओं में जिक्र मिलता है कि भ्वलनाथ या भोलानाथ एक राजकुमार था. भोलानाथ चंदवंशीय राजा उदय चन्द का पुत्र था. साधू प्रकृति का होने के कारण यह जोगी हो गया था. एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत भोल... Read more
अल्मोड़े के पान और पान वाले
आइए चलते हैं अल्मोड़ा में अल्मुड़िया पान खाने (Paan Shops of Almora). पहला पान एल.आर. शाह रोड पर एक छोटा सा रेस्टोरेंट है ग्लोरी. ग्लोरी के मालिक हैं मंजुल मित्तल और मंजुल दा के सामने है भैरव... Read more
मासी का सोमनाथ मेला
सोमनाथ भगवान शंकर का पर्यायवाची नाम है. सोमनाथेश्वर नामक स्थान पर झाड़ियों के बीच एक गुफा के अन्दर शिवलिंग की प्राप्ति हुई थी. तब वहां पर कनोडिया राजपूतों ने एक शिवालय का निर्माण करवाया था.... Read more
अल्मोड़ा की एक शाम
“दुनिया की हर शहर की शाम को नोटिस किया जाना चाहिए” ऊपर लिखे इन ग्यारह शब्दों में कोई फलसफा नहीं है,जो उसे खोजने की मगज़मारी की जाए,पर इतना जरूर है कि दिनभर की मगजमारी से तंग आदमजा... Read more
आदमजात की जितनी भी मूलभूत आवश्यकताएं हैं, उनमें पहले नंबर पर आता है खाना (Restaurants of Almora town). खाना अव्वल तो एक जरूरत है उसके बाद वह कला और विज्ञान भी है, जिसका ज़िक्र लाजिम है. अल्म... Read more
अल्मोड़े का हरिया पेले
अल्मोड़ा (Hariya Pele of Almora) से कोई चालीसेक किलोमीटर दूर एक औसत, मझोले आकार का गांवनुमा कस्बा है दन्या. दन्या की दो चीजें प्रसिद्ध हैं. नंबर एक दन्या का पराठा, नंबर दो दन्या के जोशी. इनम... Read more
अल्मोड़े में कुछ मीठा हो जाए
किसी भी शहर की बाहरी सीमा पर ही अगर मिठाई की दुकानें हों तो शहर की तासीर का अंदाजा लगाने में शायद ही कोई परेशानी होगी. अल्मोड़ा के साथ कुछ इसी टाइप का वाकया पेश आता है. करबला में पुलिस की बै... Read more
उत्तराखंड में एक से एक सुन्दर प्राचीन मंदिर हैं जिनका सदियों पुराना स्थापत्य आज भी चमत्कृत करता है. ऐसा ही एक मंदिर समूह अल्मोड़ा जिले के एक छोटे से गाँव नारायण देवल में है. “अल्मोड़ा जिले के... Read more
कुमाऊँ के मध्यकालीन शासकों में चंद्रवंशी राजा रुद्रचन्द ख़ास महत्त्व रखते हैं. रुद्रचन्द स्वयं विद्वान थे और विद्वानों का आदर भी किया करते थे. वे एक बेहतरीन कवि और नाटककार थे. वे संस्कृत के न... Read more
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