शिकायत करो कि शिकायत करना धर्म है
शिकायत मनुष्य का मौलिक गुण धर्म है. वह जिसे किसी से शिकायत न हो उसके आदमी होने में संदेह की संभावना रहती है (Complaint Culture in Offices). अल्मोड़े में ऐसा न था. यहां शिकायतें उतनी ही विविध... Read more
अल्मोड़े के पान और पान वाले
आइए चलते हैं अल्मोड़ा में अल्मुड़िया पान खाने (Paan Shops of Almora). पहला पान एल.आर. शाह रोड पर एक छोटा सा रेस्टोरेंट है ग्लोरी. ग्लोरी के मालिक हैं मंजुल मित्तल और मंजुल दा के सामने है भैरव... Read more
अल्मोड़ा की एक शाम
“दुनिया की हर शहर की शाम को नोटिस किया जाना चाहिए” ऊपर लिखे इन ग्यारह शब्दों में कोई फलसफा नहीं है,जो उसे खोजने की मगज़मारी की जाए,पर इतना जरूर है कि दिनभर की मगजमारी से तंग आदमजा... Read more
आदमजात की जितनी भी मूलभूत आवश्यकताएं हैं, उनमें पहले नंबर पर आता है खाना (Restaurants of Almora town). खाना अव्वल तो एक जरूरत है उसके बाद वह कला और विज्ञान भी है, जिसका ज़िक्र लाजिम है. अल्म... Read more
अल्मोड़े का हरिया पेले
अल्मोड़ा (Hariya Pele of Almora) से कोई चालीसेक किलोमीटर दूर एक औसत, मझोले आकार का गांवनुमा कस्बा है दन्या. दन्या की दो चीजें प्रसिद्ध हैं. नंबर एक दन्या का पराठा, नंबर दो दन्या के जोशी. इनम... Read more
अल्मोड़े में कुछ मीठा हो जाए
किसी भी शहर की बाहरी सीमा पर ही अगर मिठाई की दुकानें हों तो शहर की तासीर का अंदाजा लगाने में शायद ही कोई परेशानी होगी. अल्मोड़ा के साथ कुछ इसी टाइप का वाकया पेश आता है. करबला में पुलिस की बै... Read more
एक ऊर्जा जिसे दुनिया अल्मोड़ा नाम से जानती है
कोई भी शहर मोहल्लों से जाना जाता है. और लोग शहर के अंदर के मोहल्लों से जाने जाते हैं. अल्मोड़ा शहर लोग और मोहल्लों के मामलों में बेमिसाल है. कुमाऊँ में ही नहीं पूरे पहाड़ में बौद्धिक श्रेष्ठ... Read more
अथ डोटियाल गाथा उर्फ़ एक अल्मोड़िया तफसील
जीवन के कैनवास पर निर्माण और विध्वंस दो ऐसी थीम हैं जिनके प्रभाव से बचा हुआ कोई भी आज तक मिला नहीं. और मजे की बात कि ये दोनों बिना मजदूर के संभव नहीं हैं. अल्मोड़ा में सामान्यतः मजदूरों के दो... Read more
Popular Posts
- बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है
- जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि
- आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’
- द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा
- हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता
- पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया
- कुमाऊँ की खड़ी होली
- आधी सदी से आंदोलनरत उत्तराखंड का सबसे बड़ा गांव
- फूल, तितली और बचपन
- पर्वतीय विकास – क्या समस्या संसाधन की नहीं शासन उपेक्षा की रही?
- अनूठी शान है कुमाऊनी महिला होली की
- धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- कथा दो नंदों की
- इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी
- अल्मोड़े की लखौरी मिर्च
- एक गुरु की मूर्खता
- अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें
- प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
- यह सिस्टम बचाता है स्विट्ज़रलैंड के पहाड़वासियों को आपदा से
- 10 डिग्री की ठंड में फुटबॉल का जोश : फोटो निबन्ध
- क्या हमें कभी मिलेंगे वो फल जो ट्रेल ने कुमाऊं में खाए?
- प्रबल प्रयास की चाह में सिडकुल और उपजी विषमता
- बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से
- उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर

