शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 15
पहला दखल वो एक नम सुबह थी. ये बताना मुश्किल है कि कल रात की ओस ने देवदार की गहरी हरी छाल और उससे टकराकर निकलती हवाओं में ज्यादा नमी छोड़ी थी या मेरी आँखों में. वो हवा जो पेड़ों के गलियारों से... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 14
मुगले आजम (सलीम-अनारकली एंड वाट इज़ देयर इन नेम) इसकी पटकथा भी वहीं लिखी गयी त्रिशूल के कमरा नंबर पांच की सबसे पीछे वाली पंक्ति में जहां हमारी प्रतिभा जबर्दस्त हिलोरें मारती थी. उस दिन आनंद अ... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 13
बसासत-बसासत विलेज स्टडी टूर के समय एटीआई में इतनी राजनीति हुई जितनी कि शायद सन सैंतालीस के बाद देश भर में नहीं हुई होगी. कारण एक ही था. विलेज टूर असल में अलग-अलग ग्रुप में जाना था और राजनीति... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 12
अधिकारी बन पड़ने की ट्रेनिंग इन सबके साथ जो आश्चर्यजनक चीज़ हुई थी वो ये कि मैं, जो किसी भी दशा में संतुष्ट नहीं रहता था अब लगभग खुश था. अभी भी दूसरे पायदान पर ही था लेकिन खुश था. तीसरे पायदान... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 11
यूपीएससी उपासक की वेदना अभी पंकज सर और देवेन्द्र `चुरू’ मिले कॉरीडोर में. दोनों ऐसे चल रहे थे जैसे कोई वू-डू करके चला रहा हो. वू-डू भी नहीं बल्कि जैसे कल हेमा मैडम बता रही थीं कि यहाँ पहाड़ों... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 10
पुलिस का चेहरा बदल रहा है आज आई जी ए के रतूड़ी सर का व्याख्यान हुआ. रतूड़ी सर बोलते हैं तो उनकी आँखें चमकती हैं, लगता है आँखों ही आँखों में सामने वाले को अंदर बाहर से स्कैन कर लेते हैं. पुलिस... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 9
`कल…!’(अजी जो चला गया) डीम्ड सस्पेंशन- यदि कोई सरकारी कर्मचारी 48 घंटे से ज्यादा जेल में रहता है तो ऑटोमैटिक सस्पेंड हो जाएगा. वो तो सब ठीक है सर लेकिन ये एसीआर वरिष्ठ अधिकारी ही क्यों... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 8
मंगला को वेरी गुड मिला वो दो अगस्त 2005 था और कुल तीन बातें कमाल की हुई थीं उस दिन. हमारा मेडिकल होना था और दिन में ही बाहर निकलना हुआ बी डी पांडे अस्पताल. अस्पताल जाने में कभी खुश न होने वा... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 7
जरूरत है जरूरत है… सख्त जरूरत है ! इसके पहले मैं गंभीर गायन को बड़ी दी के `मेरे जल्फ़ को समझकर ज़रा बिजलियाँ गिराना’ से रिलेट करता था और सुगम संगीत को लाईट जाने के बाद छीना-झपटी तक उतरी ह... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 6
अमित श्रीवास्तव उत्तराखण्ड के पुलिस महकमे में काम करने वाले वाले अमित श्रीवास्तव फिलहाल हल्द्वानी में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. 6 जुलाई 1978 को जौनपुर में जन्मे अमित के गद्य की शैली... Read more
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