एक मरा हुआ मनुष्य इस समय जीवित मनुष्य की तुलना में ज़्यादा कह रहा है: मंगलेश डबराल की याद में
मैं जब भी यथार्थ का पीछा करता हूं देखता हूं वह भी मेरा पीछा कर रहा है मुझसे तेज़ भाग रहा है. उस रोज़ कौन जानता था कि वो नये सफ़र पर निकलने वाले थे. ये न घर का रास्ता था न कोई आवाज़ थी न कोई... Read more
गढ़वाल से ग्लोब तक मेरे कैसे-कैसे कमरे
तुम्हें अपने कमरे से जाने की ज़रूरत नहीं है. अपनी मेज के पास बैठे रहो और सुनो. बल्कि सुनो भी मत, बस इंतज़ार करो, ख़ामोश रहो, स्थिर और अकेले. तुम्हारे सामने ये दुनिया ख़ुदबख़ुद अपना नक़ाब उता... Read more
अच्छे लेखक को कुछ भी बरबाद नहीं कर सकता है
विलियम फॉक्नर का साक्षात्कार अनुवाद : शिवप्रसाद जोशी पेरिस रिव्यू ने विश्व साहित्यकारों के सबसे दुर्लभ साक्षात्कार किये हैं, जिनकी चर्चा 50 सालों के बाद भी जीवित हैं. इनको पढ़ते हुये... Read more
धूप और परछाई के फ़ुटबॉल में -शिवप्रसाद जोशी नौ साल पहले की सुखद स्मृतियों और उसके बाद विवादों आरोपों कलहों द्वंद्वों तनावों और चोटों के अजीबोग़रीब सिलसिलों के बाद 2011 की फ़रवरी में ब्राज़ील... Read more
फ़ितूर सरीखा एक पक्का यक़ीन
आज वीरेन डंगवाल की चौथी पुण्यतिथि है. हिन्दी कविता और पत्रकारिता में अपनी ख़ास जगह रखने वाले इस महान व्यक्ति की कविता के बहाने इस लेख में हमारे साथी शिवप्रसाद जोशी बहुत सारा और कुछ कह रहे हैं... Read more
काले गड्ढे के उस पार हॉकिंग रेडिएशन
प्रसिद्ध ब्रिटिश भौतिकविद् स्टीफन हॉकिंग का निधन उस दिन के शुरुआती लम्हों में हुआ जो महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्श्टाइन की जयंती के तौर पर जाना जाता है. अब 14 मार्च सैद्धांतिक भौतिकी की इन दो... Read more
पहाड़ के एक प्रखर वक्ता का जाना
वह ठेठ पहाड़ी थे. उत्तराखंड के पहाड़ी ग्राम्य जीवन का एक खुरदुरा, ठोस और स्थिर व्यक्तित्व. जल, जंगल और ज़मीन को किसी नारे या मुहावरे की तरह नहीं बल्कि एक प्रखर सच्चाई की तरह जीता हुआ. शमशेर... Read more
काल से होड़ लेता था कवि विष्णु खरे
पहल के ताज़ा अंक में अपनी डायरी की शुरुआत में विष्णु खरे की कविता, ‘एक कम’ की आख़िरी चार लाइनों से शुरुआत की थी. यह एक बहुत अजीब सा और अब बहुत अटपटा और उदासी जैसा संयोग लगता है. पहल 113 के ऑ... Read more
पहाड़ से ये कमाई बंद करो
हमारी जरूरत को तुम लूट का बिंदु बनाते हो -शिवप्रसाद जोशी कुदरत इसी तरह से प्रहार करती आई है. 16-17 जून 2013 का प्रहार विध्वसंक था, जानलेवा था. सैलानी थे शोर था वाहन थे धर्मांधता थी. और वर्चस... Read more
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