स्मृति शेष : मेरी यादों में शमशेर
काफल ट्री के नियमित लेखक, उत्तराखण्ड पुलिस में कार्यरत प्रमोद साह ने अपने छात्र जीवन तथा उसके बाद की डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट से जुड़ी स्मृतियाँ साझा की हैं. आज सुबह-सुबह अल्मोड़ा से जब यह मनहूस ख... Read more
अलविदा डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट
उत्तराखण्ड के जनसंघर्षों के प्रतीक डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का आज प्रातः अल्मोड़ा में निधन हो गया है. वह लम्बे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. मूलतः खटल गाँव स्याल्दे निवासी डॉ. शमशेर सिंह बिष्टका ज... Read more
2014 में डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट द्वारा लिखा गया यह लेख उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन का जीवंत दस्तावेज है. बीस वर्ष कहते ही 1994 का उत्तराखंड आँखों के सामने घूमने लगता है.वह उत्तराखंड के जीवन का एक... Read more
Popular Posts
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
- खड़कमाफी के जीवन में एक दशक से विचरते एकदंत गजराज
- क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?
- रिंगाल आधारित शिल्प : उत्तराखण्ड का एक परम्परागत कुटीर उद्योग
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
- पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे
- ‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है
- सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन
- मानव और प्रकृति का संबंध प्राचीन, गहरा और अविभाज्य है
- न रुकदि छै, न थकदि छै, नयार जन बगदि छै : संकट में है नयार
- कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
- दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है
