कब तक बैठी रहोगी इस तरह अनमनी, चलो घूम आएँ
Posted By: Kafal Treeon:
चलो घूम आएँ - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना उठो, कब तक बैठी रहोगीइस तरह अनमनीचलो घूम आएँ.तुम अपनी बरसाती डाल लोमैं छाता खोल लेता हूँबादल –वह तो भीतर बरस रहे हैंझीसियाँ पड़नी शुरु हो गई हैंजब झमाझम... Read more
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा
Posted By: Kafal Treeon:
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैं मुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर खड़ा होना मैंने सीख लिया है. घबराओ मत मैं क्ष... Read more
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